अभी हाल ही में चेतन भगत की नयी पुस्तक “Three Mistakes of My Life” पढी। एक टाइमपास किताब…बिना दिमाग लगाये पढने बैठिये, कुछ पात्र और घटनाएं आपको अपने आसपास की नजर आयेंगी…थोडा बहुत उनसे रिलेट करिये और ३-४ घंटे में खत्म करके अपने काम पर लगिये। यह पोस्ट “Three Mistakes of My Life” के बारे में नही है।
चेतन भगत की पहली किताब “Five Point Someone…”, IIT के छात्रों की जिन्दगी पर आधारित थी। देश में हर साल करीब २ लाख इंजिनीयर निकलते हैं और हर इंजीनीयर ने, प्रवेश परीक्षा की तैयारी के समय IIT का सपना जरूर देखा होता है। इस हिसाब से किताब एक बहुत बडे मार्केट को टार्गेट करती थी। किताब अच्छी बिकी। इस किताब ने एक नया ट्रेन्ड स्थापित किया और फिर कई नये-नये लेखकों की IIT, IIM और अन्य कालेजों की जिन्दगी पर आधारित कई पुस्तकें आई। कुछ पढी भी गईं, कुछ ऐसे ही निकल गईं..पर “पाँच दशमलव…” एक बेन्चमार्क बन गई।
खैर,यहां लिखने का मूल मकसद चेतन भगत पर चर्चा करना भी नही है, पर इस प्रक्रिया पर चर्चा करना है। हल्का फुल्का लेखन, युवाओं पर केन्द्रित, मध्यवर्ग पर केन्द्रित जिसमें बहुत भारी भरकम कथानक होने की बजाय आसपास की जिन्दगी के कुछ पात्र हों। थोडी सी मार्केटिंग और ब्रांडिंग। जेब को सूट करती कीमत। एक फार्मूले जैसा। (“Three Mistakes of My Life” ९९ रुपये की है..हालांकि कीमत कम करने के चक्कर में किताब की छपाई और बाइंडिंग एकदम घटिया कर दी गई)।
पिछले कुछ दिनों से सोंच रहा हूं कि हिन्दी में अगर इस तरह की किताबें आने लगें, तो उन्हे कितना पडा पाठक वर्ग मिल सकता है। कितना बडा बाजार है? क्या इस तरह का लेखन हिन्दी में अभी होता भी है?
मुझे लगता है कि हिन्दी में इस तरह की किताबों का बडा बाजार होगा। हिन्दी के २-३ अखबार अपनी-अपनी पाठक संख्या १ करोड से ऊपर बताते हैं। क्या इन पाठकों में से एक प्रतिशत भी हिन्दी में हल्के फुल्के लेखन को नही पढाना चाहेंगे। पिछली जुलाई में हैरी पाटर की सातवीं किताब रिलीज होने के समय हिन्दी में उसकी पांचवी किताब का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हुआ था और हाथों-हाथ ५००० प्रतियां बिक गईं थी थी। हैरी पाटर पुस्तकों की पहली पाँच किताबों के हिन्दी अनुवादों की अब तक १ लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं, जिनकी कीमत २००/- से ३५०/- तक थी। खबर यहां पढें। इन्हे प्रकाशित करने वाले मंजुल पब्लिशिंग हाउस एवं हिन्दी के अन्य प्रकाशक इन प्रक्रिया को किस तरह देखते हैं, पता नही…लेकिन अगर वो थोडी रुचि लें तो शायद अच्छा खासा मार्केट बन सकता है कई नये लेखक उभर सकते हैं। (हिन्दी के वर्तमान लेखकों की अपनी जानकारी बहुत अच्छी नही है।)
पिछले कुछ दिनों से मैं कमलेश्वर की “कितने पाकिस्तान” भी पढने की कोशिश कर रहा हूं। इस पुस्तक का काफी नाम सुना था और बहुत समय से पढने की इच्छा थी। मई अंत में नागपुर स्टेशन पर खरीदी, पर अभी तक आधी ही पढ पाया हूं। दिक्कत ये है कि एक बार में ३-४ पेज से ज्यादा नही पढ पाता। क्योंकि पढ कर उसे सोंचना पडता है, मनन करना पडता है और फिर पचाना पडता है। चेतन भगत नुमा पुस्तकों में आपको प्रोसेसिंग कुछ नही करनी पडती और हम जैसे कम समझ लोगों को भी आसानी से समझ आ जाती हैं…नतीजा टारगेट मार्केट में बढोतरी। अंग्रेजी पुस्तकों में रुचि रखने वाले भारतीय युवाओं से ही पूंछ लीजिये, कितने लोगों ने चेतन भगत को पढा है …और कितने लोग विक्रम सेठ को।…अन्तर पता चल जायेगा।
अब आते हैं इस पोस्ट के मूल मकसद पर। मुझे लगता है कि हिन्दी चिट्ठाकारों से में कई लोगों में इस तरह का लिख पाने की संभवनाएं हैं। जिनकी भाषा और मुद्दे बहुत भारी नही होते, पढने-समझने में आसान होते हैं , आसपास की ज़िन्दगी से जुडे होते हैं। कई चिट्ठाकारों की कई पोस्ट्स इतनी बेहतरीन हैं कि उन्ही का संकलन कर के एक किताब छपवाई जा सकती है। तो बताइये, कैसा आइडिया है, और आप कब किताब लिखना शुरू कर रहे हैं।


एक लाख की बात आपने कह दी भाईसाहब। बहुत ही सुंदर विचार। पहल करना ही चाहिए।
आप शुरुआत कीजिए!
बहुत ही सुंदर विचार…
बहुत सुन्दर विचार है। कई बार हमारे में उठा लेकिन बैठ गया। सोचा था कि अच्छी ब्लाग पोस्टों का चयन करके छपवाया जाये लेकिन फिर वही हुआ न कि बैठ गया।
कितने पाकिस्तान को मैं भी आधे में ही छोड़ गया।
कोई उपन्यास सफल तभी होता हे जब उसके पात्रों के चरित्र से आप अपने आप को जोड़ पाते हैं। चेतन की लेखनी रोचक तरीके से यही काम करती है। रही किताब लिखने की बात तब वो तभी संभव है जब प्रकाशक चिट्ठाकारों के बारे में आपकी राय से सहमत हों।:)
कितने पाकिस्तान को समझने की कोशिश भी न करें……….. मैं दो तीन पेज के बाद ही किताब से परेशान हो गया…… कारगिल प्रकरण के बारे में उन्होंने मूलभूत रूप से ग़लत और तथ्यरहित बातें कहीं हैं जो की सन निन्यानवे के सेक्यूलर प्रेस ने उड़ाई थीं……… राय कायम करने से पहले कुछ रुक तो जाते, बातें साफ होने का थोड़ा इंतजार कर लिया होता कमलेश्वर जी ने.
उसी की तैयारी में जुटता हूँ बाकी तो अंधकार नियमित साथ निभा रहा है. आप ने आशा की किरण दी है तो आभार कह देता हूँ.
आप ब्लागरों को प्रोत्साहित करते रहिए, कोई तो टपकेगा ही।
आपको लगता है भगत जैसी हिन्दी किताब के लिए कोई 100 रू. देगा भी?
वैसे विचार बहुत उत्तम है.
चलो जी, आपने कहा तो पहले “Five Point Someone…” पढ़ता हूं, जो पास में है पर पढ़ी नहीं।
लिखने की उसके बाद सोचूंगा।
वैसे इसमें खतरा भी है। कहीं चिट्ठाकारों की पुस्तकें छपने लगीं तो इतने मुक्त भाव से टिपियाने नहीं आयेंगे।
चलिये आप शुरुआत तो करिये, एक चिट्ठाकार की किताब छपी तो बाद में और भी लोग हिम्मत करेंगे।
और हाँ मैं भी पिछले दो साल से मर्जों का दुभाषिया और कॉमरेड गोडसे समझने की कोशिश कर रहा हूँ, अब तक समझ में नहीं आई।
Mitra,
IIFM ke literary genius to tumhi ho, aagaj karo, it will be agd read with chapters on CSR,BPP,JP,PD,HSG,RS,BPP and above all DKB…:-)
Even i have wondered often about lack good hindi books like you have in english. it will be really good if this blog motivated some of fellow hindi bloggers.
इस विषय पर और लिखने की आवश्यकता है ! प्रकाशक और लेखन के बारे में अधिक जानकारी कहाँ से मिल सकेगी ? कृपया सहायता करें
I agree with your point. I have read all the three books of chatan bhagat. All are very light in reading. one can enjoy these books even when he is working on long projects and has no time for weeks. In all three, I like “Five point someone” most, then “three mistake of my life” but “one night @ call center” was not that much good.
As far as hind books are concerned, I think it will be a successful formula for writer and publisher both. Because when I saw people at metro stations buying these books, I found that they were not from the class who liked only english book. They would definitely like hindi book. Only condition is story should be from around us and their price should also be reasonable.
Nitin, u have given this idea so it wud be good if u cud become the torch bearer too.I too have read all books by Chetan Bhagat and i find that the latest is the weakesh of the three.
संजय भाई, मुझे लगता है सही से मार्केटिंग करने की जरूरत है…बंदा १०० तो क्या २०० भी देगा।
सतीश सक्सेना – प्रकाशकों की जानकारी तो मुझे भी नही है सतीश जी। मंजुल का लिंक तो दिया हुआ है। शायद दिल्लीवासी लोग कुछ बता पाएं। इसके सिवा मेरठ से भी पाकेट बुक्स खूब छपती हैं।
[...] है…जैसा कि मैने अपने पिछले लेख में लिखा [...]
bahut hi nek vichar hai sir aapka, main thoda bahut likhata rahata hoon, kavitaon se mujhe jyada pyar hai. parantu main upnyan , kaghani, aur natak bhi likhna chahta hoon. kripa kar mujhe ye bataye ki hindi me kaise apne vichar bhej sakte hai? dhnyvad sahit ….raj