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Archive for the ‘मीडिया’ Category

समाचार एवं सूचना साइट रेडिफ ने हाल ही में अपने कलेवर की झाड-पोंछ की है। हालांकि मेक-अप, पाउडर और लीपापोती ही ज्यादा है…कंटेंट के नाम पर अभी भी वही उलूल-लजुलूल स्लाइड शो होते हैं। पर मुखपृष्ठ पर अब ज्यादा भीड-भाड नही दिखाई देती, बस चुनिंदा आइकन और लिंक्स दिखाई देते हैं। हालांकि साइट में थोडा अन्दर जाने पर लगने लगता है कि ज्यादा काट-छांट के चक्कर में Nevigation थोडा मुश्किल हो गया है। मसलन आप अगर Movies वाले हिस्से में विचर रहे हैं तो वहां से News वाले हिस्से में पहुंचने के लिये आपको वापस मुख पृष्ठ पर आना पडेगा।

खैर , ये तो Designing का मामला है, पर यह देखिये कि अपने Sports वाले हिस्से को रेडिफ मात्र Cricket कहना पसन्द करता है। याने क्रिकेट सब सारों का सार हो गया है। अगर इस भाग में सिर्फ क्रिकेट से जुडी खबरें होती तो ठीक था, पर खबरें आपको यहां सभी खेलों से जुडी मिलेंगी, Url भी http://www.rediff.com/sports है, लेकिन इसे जाना क्रिकेट के नाम से जाना जाता है। सही है…हिन्दुस्तान में वैसे भी क्रिकेट के आगे बाकी सारे खेल पानी भरते हैं।

रेडिफ

और हाँ..कभी मन नही लग रहा हो और दिमाग का दही करने का मूड हो तो रेडिफ के लेखों के Discussion Board देखियेगा।  टाइमपास और सर खुजाने  के लिये अच्छी जगह है। 🙂

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अलंबरदार NDTV और उनकी एक प्रिय चेहरे की एक हरकत की खबर अभी हाल ही में अंग्रेजी ब्लागमंडल में घूमते हुए मिली जहाँ एक ब्लागर को कानूनी कार्यवाही के सम्मन के जरिये अपनी पोस्ट हटाने और सार्वजनिक रूप से माफीनामा लिखने के लिये मजबूर किया गया।

ब्लागर चैतन्य कुंटे ने अपने ब्लाग पर मुम्बई धमाकों के दौरान हुई मीडिया कवरेज को आडे हाथों लेते हुए इस चैनल और इसके रिपोर्टर पर एक पोस्ट लिखा थी। (पोस्ट अब हटा दी गई है…पर जय हो गूगल Cache की, इंटरनेट पर तो सब कुछ मौजूद रहता ही है, इस पेज पर सबसे नीचे वाला आलेख देखें)। उसके बाद NDTV ने उन पर कानूनी कार्यवाही का सम्मन भेजा (इस पेज पर दूसरा संदेश देखें)। चैतन्य ने अपनी वो पोस्ट हटा ली और यह माफीनामा अपने ब्लाग पर डाला।

और जानकारी एवं अन्य अंग्रेजी चिट्ठाकारों के विचार यहाँ पढें।

यह है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकारों की हकीकत। इन्हे अपनी आलोचना बिल्कुल बर्दाश्त नही। सवाल यह नही है कि ब्लागर ने जो लिखा था वो कितना सही या गलत था…लेकिन अगर इसी प्रकार का नोटिस कोई नेता किसी टी वी चैनल को थमा दे तो कितना हल्ला मचाया जायेगा? याने आप  अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाठ सबको पढाओ लेकिने खुद अपने बारे में एक शब्द सुनने को तैयार नही…।

क्या किसी ब्लागर से उसकी पोस्ट डिलीट करवाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटना नही माना जायेगा? और क्या दुनिया भर की आलोचना करने वाले समाचार चैनल और इनके कर्णधार आलोचनाओं से परे हैं?

मुझे ताज्जुब है कि हिन्दी ब्लागमंडल में इस घटना पर अब तक कोई चर्चा नही हुई है (या शायद मेरी नजर नही पडी)। गुजारिश करूंगा की अगर आपको ये गलत लगता है तो इसके विरोध में अपने ब्लाग पर एक पोस्ट जरूर लिखें।

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टी वी पर समाचार देख/सुन रहे थे कल। समाचार वाचक सुन्दरी ने मौसम का हाल बताते हुए , मुस्कुराते हुए अंग्रेजी में जो कहा उसका आशय कुछ ऐसा था “दिल्ली और उत्तरप्रदेश के लोग राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि यहां बारिश की संभावनाएं हैं” (चैनल का नाम ध्यान नही) । पता नही उनका सामान्य ज्ञान कैसा था…या फिर उनके लिये लोगों से मतलब सिर्फ शहरों में रहने वाले, नौकरीपेशा लोग होते  होंगे (गांव में कौन अंग्रेजी चैनल देखता है)…लेकिन  साल के इस समय हिन्दुस्तान भर के खेतों की फसल कट कर खलिहानों में रखी होती है और हल्की सी बरसात उसकी गुणवत्ता बिगाड सकती है। ज्यादा हो जाये तो भगवान ही मालिक है। तो बारिश इस समय राहत की सांस नही होती…गले की फांस हो जाती है। फसल के सही पैसे आये तो ही पुराने कर्जे चुकेंगे, बच्चों की शादियां निपटेंगीं और अगली फसल की तैयारी हो पायेगी। बहुत उम्मीदें बंधी होती हैं। शायद टी वी सुन्दरी को इस बात की जानकारी हो।

मौसम कुछ ऐसा बिगड रहा है कि मेरे गृह जिले झालावाड और उसके आसपास भी मौसम खराब हो रहा है और यहां १५०० किलेमीटर दूर हैदराबाद में भी पिछला सप्ताह गीला बीता..आज सुबह भी मौसम बेइमान हो रहा था। सिर्फ किसान ही नही..आइसक्रीम बेचने वाला मेरा  FlatMate भी  मौसम के मिजाज से दुखी है…अप्रेल का महीना आ गया और बेचारे की बिक्री अभी तक परवान नही चढी।

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