अपनी रोज की पठन खुराक -
अखबार – टाइम्स आफ इंडिया – कागजी प्रारूप- पूरा नही पढा जाता- सरसरी निगाह ही डाल पाते है।
गूगल रीडर पर चुनिन्दा हिन्दी-अंग्रेजी चिट्ठे जिनकी फीड सदस्यता मैने ले रखी है।
दैनिक भास्कर- इंटरनेट संस्करण- विशेष रूप से जय प्रकाश चौकसे का कालम परदे के पीछे ।
राजस्थान पत्रिका – इंटरनेट संस्करण – विशेष रूप से मेरे गृह जिले झालावाड की खबरें ।
कभी कभार देसी पंडित से चुनिन्दा अंग्रेजी चिट्ठे ।
रेडिफ पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरें – हाल ही में कलेवर बदल देने के बाद से पठनीयता कम हो गई है। विकल्प की तलाश है।
ब्लागवाणी पर एक सरसरी निगाह डालते हुए कुछ चिट्ठे ।
पुस्तकें पढना आजकल खत्म सा हो गया है। पुनः शुरु करने के प्रयास जारी हैं। कई पुस्तकें बाट जोह रही हैं।
आप रोज क्या पढते हैं?

वाह जी क्या खुराक है…सेहत जरूर बढिया रहेगी…बहुत खूब ..लगता है हमें भी अपनी ऐसी ही खुराक तय करनी होगी….
Achcha hai.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।
आप रोज क्या पढते हैं?
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अखबार छूत जाता है कोरा। पर पुस्तक के कुछ पन्ने पलट ही लेते हैं!
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डेजमंड मोरिस तक पहुँच हैं तो जाहिर है अच्छे स्वाध्यायी हैं आप -
यदि आप अब तक अग्निवीर पर नहीं जाते तो बहुत पीछे छूट रहे है ….
इसे भी अपनी दैनिक पठान सामग्री में जोडीये ..
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