हरिओम पवांर को मैने पहली बार १९९६-९७ के आसपास सुना था। वे वीर रस के कवि हैं। हम ११-१२ वीं कक्षा में थे और हमारे अंग्रेजी के अध्यापक श्री ए पी सिंह के पास इनकी गाई हुई कविताओं की कैसेट थी। “मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूँ”।
१२ वीं के बाद स्कूल [...]
Archive for August, 2008
हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
Posted in Video, कविता, विचार, tagged हरि ओम पंवार, Hari Om Pawar on August 30, 2008 | 81 Comments »
Food for Thought – दिमाग (का) खाना
Posted in विचार on August 23, 2008 | 6 Comments »
सच है कि जिन्दगी शतरंज की बिसात नही जहाँ हर कदम चलने से पहले आगे और पीछे की सौ संभावित चालों के बारे में सोंचा जाये…लेकिन जिन्दगी कटी पतंग भी तो नही कि बस हवाओं से सहारे उडे और किसी पेड पर उलझ जाये?
- २/३ साल पहले IIFM में सुने एक व्याख्यान से

