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Archive for April, 2008

तेलुगु नव वर्ष (युगादि) पर दोस्तों के साथ श्रीसैलम जाने का मौका मिला जहाँ भारत के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक और शक्तिपीठ हैं। सुबह सवेरे की बस पकड कर छः घंटे के सफर के उपरांत श्री सैलम पहुँचे, ये आपने पिछली पोस्ट में पढा। अब आगे….
बस से उतर कर जो आगे का नजारा किया [...]

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पंकज उधास साहब के साथ एक शाम का जिक्र मैने अपनी पिछली पोस्ट में किया था। मेरे मित्र मुरली ने कुछ गज़लें अपने मोबाइल पर रिकार्ड की थीं, यू ट्यूब पर उन्हे अब चढा पाया हूँ। आप भी सुनिये।
पहली है, “हुई मंहंगी बहुत शराब, थोडी थोडी पिया करो”। आपने शायद पहले भी सुनी होगी। [...]

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पिछली दो पोस्ट्स में मैने बचपन की कुछ बातें लिखी थीं..मसलन बचपन के टोटके और बचपन की तमन्नाएं। एक और चीज़ जिस पर मैं लिखना चाहता था वो थे..बचपन के डर और चिन्ताएं। पर लिखते लिखते रह गया। कारण यह, कि अगर सबको पता चला जाता कि मैं बचपन में रात में अकेले घर की [...]

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आजतक मैने सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम को लाइव देखा है…पलाश सेन का यूफोरिया बैण्ड। इंजिनियरिंग के समय कालेज में आया था और चार घंटे तक खडे खडे हम झूमते-नाचते-कूदते रहे थे। बस उसके बाद कोई मौका ही नही लगा। पिछले दो साल में यहां हैदराबाद में गुलाम अली साहब और जगजीत सिंह जी आकर अपनी [...]

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हैदराबाद आये दो साल पूरे होने को आये पर आंध्रप्रदेश की कोई जगह देखने का मौका नही मिला था अब तक, सिवाय विशाखापट्टम के जहां किस्मत से २००६ में एक दोपहर बिताने का मौका मिला था। हैदराबाद को नही गिन रहा हूं यहां। २-३ बार कार्यक्रम बनाने की सोंची…पर सोंचते ही रहे गये। वो कार्यक्रम [...]

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झूले में बैठने का मन है? आइये आपको हैदराबाद में “राजस्थानी हवाई झुल्ला” में सैर करवाते हैं।

गेट पर लिखा हुआ है “शराब पिके झुले पर बैठना मना है।” यार शराब पिके  झूले पे कोई क्यों पैसा बरबाद करेगा… पीकर तो आदमी का दिल, दिमाग ,जिस्म सभी कुछ झूमता और झूलता ही रहता है [...]

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