मौसम का मिजाज…
March 31, 2008 by Nitin Bagla
टी वी पर समाचार देख/सुन रहे थे कल। समाचार वाचक सुन्दरी ने मौसम का हाल बताते हुए , मुस्कुराते हुए अंग्रेजी में जो कहा उसका आशय कुछ ऐसा था “दिल्ली और उत्तरप्रदेश के लोग राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि यहां बारिश की संभावनाएं हैं” (चैनल का नाम ध्यान नही) । पता नही उनका सामान्य ज्ञान कैसा था…या फिर उनके लिये लोगों से मतलब सिर्फ शहरों में रहने वाले, नौकरीपेशा लोग होते होंगे (गांव में कौन अंग्रेजी चैनल देखता है)…लेकिन साल के इस समय हिन्दुस्तान भर के खेतों की फसल कट कर खलिहानों में रखी होती है और हल्की सी बरसात उसकी गुणवत्ता बिगाड सकती है। ज्यादा हो जाये तो भगवान ही मालिक है। तो बारिश इस समय राहत की सांस नही होती…गले की फांस हो जाती है। फसल के सही पैसे आये तो ही पुराने कर्जे चुकेंगे, बच्चों की शादियां निपटेंगीं और अगली फसल की तैयारी हो पायेगी। बहुत उम्मीदें बंधी होती हैं। शायद टी वी सुन्दरी को इस बात की जानकारी हो।
मौसम कुछ ऐसा बिगड रहा है कि मेरे गृह जिले झालावाड और उसके आसपास भी मौसम खराब हो रहा है और यहां १५०० किलेमीटर दूर हैदराबाद में भी पिछला सप्ताह गीला बीता..आज सुबह भी मौसम बेइमान हो रहा था। सिर्फ किसान ही नही..आइसक्रीम बेचने वाला मेरा FlatMate भी मौसम के मिजाज से दुखी है…अप्रेल का महीना आ गया और बेचारे की बिक्री अभी तक परवान नही चढी।


ये मौसम की मार ! किसे बुरा-भला कहा जाए?
बेचारी टीवी वाली को तो मुस्कुरा कर ही बताना है। उसके काम का मानक तरीका है यह। वे और यान परिचारिकायें काम के बाद घर लौटती होंगी तो दिन भर जबरन मुस्कराने के कारण जबड़ा दर्द करता होगा!
mijaj badlange mousam ke ,thoda khuda par aitbar kar
apni dard bhari aah ko,na kisi hasina ke hoto par swar kar
gar nuksan hoga apna,to mahangai ka para bhi aasman chadega
uske mathe par bhi salvate dekhne lagengi,jab kharcha make-up ka badhega
चैनल वालों को क्या दोष देना,ये तो सिर्फ़ आप और हम जैसे लोग ही समझ सकते हैं जिनका ताल्लुक गांव की मिट्टी से रहा है.गेहूं की फ़सल कट कर खेतों में पडी है, वर्षा की हल्की फ़ुहार ही उसे नष्ट करने को काफ़ी है.शहर वाले तन के सुख को ही मन का सुख मान बैठे हैं, किसान की चिन्ता उन्हें क्यूंकर होगी?
भई ऐसा है एक चीज एक के लिए उपयोगी तो दुसरे के लिए अनुपयोगी हो सकती है. अंग्रेजी में समझने वालो के लिए बारिस राहत ही थी.
दिनेश जी, ज्ञानदत्त जी, रजनीश, इलाजी, संजय जी- टिप्पणी के लिये धन्यवाद।
रजनीश- बहुत खूब कहा आपने। पर उसके माथे कोई शिकन नही पडने वाली…मेकअप तो नौकरी के समय स्टूडियो में ही हो जाता है ना।
shayad comments ke dauran main baat reh gayi…. mausam ki maar!! pichhle kuch dinon se yaatra kar raha hoon, aur kheton main toote hue gehun jhaad bahut dekhe maine..
dilli main bhi baarish hui - chaliye wahan maan lijiye kheti nahin hoti par UP , MP!!