कुछ वक्तव्य (बोले तो…Statement) होते हैं..जो चुनिन्दा जगहों पर, चुनिन्दा परिस्थितियों में,छँटे हुए चुनिन्दा लोगों से अपेक्षित होते हैं। अक्सर ये वक्तव्य टेलिविजन कैमरे के सामने दिये जाने के लिये होते हैं…नेता, अभिनेता, क्रिकेटर ,अफसर…हर कोई इनका इस्तेमाल अपने हिसाब से करता है। इनमे नया कुछ नही होता, इनका कोई कैसा भी मतलब निकाल सकता है। अक्सर ये वक्तव्य सुनने वाले की जानकारी में कोई इजाफा नही करते और इनमें वही बात दुहराई जाती है जो सुनने वाले और बोलने वाले , दोनो को पता होती है। चूंकि कुछ दुनिया में रहना है और कुछ न कुछ कहना तो है ही…सो कह देते हैं। नीचे कुछ नमूने दे रहा हूं…नोट कर लीजिये..वैसे तो, राम करे आपको इनकी जरूरत न पडे…पर पड जाये तो ये न कहियेगा कि पहले बताया नही था। चाहें तो धन्यवाद भी टिका सकते हैं
क्रिकेट
-pitch was good and ball was coming on to bat
-Boys played well
-It was a team effort
नेतागिरी
-यह नीति जन विरोधी हैं हम इसका विरोध करते हैं (जब खुद सत्ता में थे..तब तुम्ही ने लागू की थी भाई)
-मुझे फँसाया जा रहा है
-हम चाहते हैं कि मामले की जाँच सी.बी.आई. को सौंप दी जाये (ताकि हमारे स्वर्ग सिधारने तक भी जाँच पूरी ना होने पाये)
-मैं अदालत के फैसले का सम्मान करता हूँ
मीडिया
-Exclusive: हम आपको बता दें यह खबर सिर्फ हमारे चैनल पर दिखाई जा रही है (दरअसल, सिर्फ हमारे रिपोर्टर पेड पर चढकर गिलहरी के अंडे गिनने के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं)
-क्या आप हमें सुन सकते हैं…लगता है सम्पर्क टूट गया है (सम्पर्क नही टूटा..पेड की डाल टूट गई)
-मीडिया समाज का आईना है। मीडिया सिर्फ वो दिखाता है जो जनता देखना चाहती है (और जनता बेचारी चैनल पर चैनल बदल कर सिर्फ वो देखती रहती है नो मीडिया दिखाता जा रहा है।)
फिल्म जगत
-हम बस अच्छे दोस्त हैं
-अभी तो हमें अपने कैरियर पर ध्यान देना है (..बे पिछले ७ साल से क्या कर रहे हो?)
-यह दृश्य कहानी की मांग थी
-यह फिल्म एकदम हटके है
पुलिस
-हमें कुछ महत्त्वपूर्ण सूत्र मिले हैं, तफ्तीश जारी है, अभी कुछ भी बताने से मामले की जाँच पर असर पड सकता है (दरअसल अभी खुद हमें ही कुछ नही मालूम)
-दुर्घटना की जाँच के लिये कमेटी बनाई गई है (यह किसी भी मामले को लम्बा लटकाने का रामबाण तरीका है)
-शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है (दो महीने बाद वापस बहाल कर देंगे ये खबर कहीं नही छपती)
शेयर बाजार
-बाजार गिर सकता है…उठ भी सकता है
-…But the market fundamentals are strong
अगर कभी कुछ गलत कह कर फँस जायें…
-”मेरे वक्तव्य को तोड मरोड कर पेश किया गया…मैने ऐसा तो नही कहा था”
वाह क्या कहने!
भैया। मोहन राकेश के नाटक आषाढ़ के एक दिन का अंक याद आ गया। वाकई बहुत खूब।
वाह, क्या छांट छांट कर फूल चुने हैं।
वाह भई वाह,,, क्या चुन चुन कर निकाला है.
bilkul sahi hai
चून चून कर मारा है
बहुत खुब. मजा आया.
gd collection
बहुत खूब ………