न्यूटन बाबा कह गये हैं कि कोई वस्तु, जिस अवस्था में है..उसी में रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाहरी दबाव ना डाला जाय। अगर रुकी है, तो रुकी रहेगी और अगर चलायमान है…तो चलती ही जायेगी, उसी गति से..बिना किसी घट बढ के। बाबा वैज्ञानिक तो थे, पर मनोवैज्ञानिक भी थे, ये पता [...]
Archive for January, 2008
Driving Force
Posted in बकर, विचार on January 24, 2008 | 7 Comments »
किताबें…इन दिनों
Posted in Book, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, हिन्दी on January 3, 2008 | 11 Comments »
दिसम्बर में हैदराबाद में एक पुस्तक मेला लगा था, जिसकी कि खबर मुझे मेले के आखिरी दिन लगी। किस्मत से उस दिन शनिवार था सो घूमते फिरते पहुँचे और करीब ३-४ घंटे वहाँ बिताये। अधिकांश अंग्रेजी पुस्तकों के स्टाल, कुछ तेलुगु, एक-दो उर्दू पुस्तकों के स्टाल। और से २-३ स्टाल हिन्दी प्रकाशकों के भी। हैदराबाद [...]

