‘चक दे इंडिया’ देख कर मैने लिखा था कि ..”अंडरडाग की जीत की कहानी अक्सर हम सब को पसंद आती है…जाने अन्जाने हम अपने आप को अंडरडाग से जुडा महसूस करते है..”। जाने क्यों..’आजा-नच-ले’ देखते देखते मुझे चक दे इंडिया याद आती रही। शायद इसलिये भी, कि जिन जयदीप साहनी ने चक दे इंडिया लिखी [...]
Archive for December 1st, 2007
आजा नच ले: जा… नच ले!
Posted in Movie, फिल्म चर्चा, फ़िल्म on December 1, 2007 | 10 Comments »
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- Tarun on हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
- sachin tyagi on हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
- SHESHMA on पंकज उधास के साथ एक शाम
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- Dr. Ishwer Singh Teotia on हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
- ajaychoudhary on हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
- Dr. Ishwer Singh on हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।
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