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Archive for December, 2007

भाग १- काँच की सडकें
भाग २- परदेस में खाना-पीना

कार्यक्रम इतना टाइट था, कि पेरिस घूमने के लिये लौटते वक्त मात्र शुक्रवार की दोपहर और शाम मेरे पास थी…शनिवार दिन में ११-१२ बजे वापसी थी। क्या देखें, क्या छोडें..और क्या खरीदें। मेरे साथ वन्दना जी और सुरीता जी थे जो फ्रांस में मेरी मुँह और कान [...]

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‘चक दे इंडिया’ देख कर मैने लिखा था कि ..”अंडरडाग की जीत की कहानी अक्सर हम सब को पसंद आती है…जाने अन्जाने हम अपने आप को अंडरडाग से जुडा महसूस करते है..”। जाने क्यों..’आजा-नच-ले’ देखते देखते मुझे चक दे इंडिया याद आती रही। शायद इसलिये भी, कि जिन जयदीप साहनी ने चक दे इंडिया लिखी [...]

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