भारत की चुनौतियां
November 29, 2007 by Nitin Bagla
कहते हैं अगर आप आज भारत में हैं तो आप सही समय पर सही जगह पर हैं। एक ऐसा देश, जिसका ‘समय’ आ गया है। जहां हैं अन्तहीन संभावनाएं, सपने देखने और पूरे करने की आज़ादी और माहौल। ९% की वर्षिक दर से बढता सकल घरेलू उत्पाद (जी डी पी)। रोज नई उँचाइया छूता शेयर बाजार का सूचकांक। दुनिया पर छा जाने को तैयार कंपनियां। ११० करोड लोग, जिनमे से आधे १५ से ४५ वर्ष की उम्र के युवा, याने दुनिया की सबसे बडी कामगारों की फौज। मजबूत लोकतंत्र(!)(जो देवेगौडा जैसों को झेल जाये वो वाकई मजबूत है)। स्वतंत्र, निष्पक्ष या (competitive!) मीडिया।
लेकिन ऐसा नही है कि सब कुछ हरा ही हरा है। मजबूत लोकतंत्र है तो नंदीग्राम/गोधरा/आसाम और देवगौडा भी हैं, चमचमाते माल हैं तो विदर्भ के किसान भी हैं, नित नए मल्टीप्ल्क्स और सिनेमाघर खुल रहे हैं तो महानगरों और शहरों में एक घंटे की बारिश पूरी व्यवस्था की पोल खोल देती है। स्कूल हैं तो अध्यापक नही हैं और अगर हैं भी तो दूरदराज की गांवों में नियमित नही पहुँचते। हवाई यात्राएं तो सस्ती हो गई है तो हवाई अड्डों के हाल बस अड्डों से भी बुरे। वाहनों की बेहताशा बिक्री बढी है, तो सडकें छोटी पडने लगी हैं। हर हाथ में मोबाइल फोन तो दिखाई देने लगा है पर हर प्लग में बिजली नही है। मुनाफा कमाती रेल है पर उसके अंदर की धकापेल भी है। याने ११० करोड के इस देश में काफी कुछ अभी भी रामभरोसे ही चलता है।
अगले कुछ समय में, मैं इस ब्लाग पर वे मुद्दे एक-एक करके रखना चाहूंगा जो हमारे भारत के आने वाले समय के लिये बडी चुनौतियां साबित होने वाले हैं। मकसद कमियां गिनाना नही है वरन संभावित समस्याओं/चुनौतियों की और ध्यानाकर्षित करने का है और उनसे निबटने के लिये उठाये जा रहे/जा सकने वाले कदमों पर चर्चा करने का है। एक तरह का SWOT Analysis करने का प्रयास रहेगा। ये मुद्दे सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी, किसी भी क्षेत्र से हो सकते हैं..कुछ पर मेरी सही-साट पकड है तो कुछ में डिब्बा गोल। लेकिन कोशिश रहेगी कि विभिन्न स्रोतों से जानकारी बटोरी कर अच्छे से लिखा जाए।
हर देश और काल में, हर पीढी की अपनी प्राथमिकताएं होती हैं, अपनी समस्याएं होती हैं और उन्ही के स्तर पर सोंचे गये समाधान होते हैं। उस काल विशेष में ऐसा लगता है कि जो हम कर रहे हैं वो सबसे सही है..इससे पहले के लोग इतना अच्छा कभी नही कर पाते..और आने वाले शायद ही कर पाएं। बुजुर्गों को युवा पीढी नालायक और नाकारा लगती है तो युवाओं को लगता है कि बुजुर्ग कितने पीछे हैं अपने समय से । लेकिन वाकई में ऐसा होता नही है। चूंकि देश काल समय और परिस्थिति के हिसाब से परिपेक्ष्य बदल जाते हैं सो चीजों को देखने का नजरिया भी बदल जाता है। बुजुर्गों को अतीत और युवाओं को भविष्य चाहे जितना भी उजला लगे…जीना सबको वर्तमान में होता है, समस्याएं/चुनौतियां वर्तमान होती हैं..समाधान भी उसी वर्तमान के हिसाब से तय होते हैं, हां अतीत से सबक ले सकते है, और भविष्य से अपेक्षाएं की जा सकती हैं।
अगली बार - मानव संसाधन और रोजगापरकता (Human Resource and Employability)

प्रतीक्षा है..; जरूर लिखिये। समस्यायों और चुनौतियों को अच्छी तरह पहचान कर लेने पर ही उनके समाधान की आशा की जा सकती है। इसलिये आपका यह काम काफी महत्व का है।
किसी भी क्षेत्र मे सफलता अर्जित करने के लिए उसे यदि चुनौती के रूप मे लिया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है इसीलिए हर चुनौती क़ी पहचान करना भी ज़रूरी है कि चुनौती को किस रूप मे लेना है अथवा स्वीकार करना है.
मेरे विचर में, आने वाले समय में भारत की सबसे बड़ी चुनौती होगी - पानी, साफई, संसाधन, और पर्यावरर्ण।
इन्द्रधनुष है जी, भारत में सभी रंग हैं।
Guess who just brightened up my day?
Thanks a lot!
well thought, nitin
rajneesh while addressing a meeting (famous “bharat ke jalte prashn”), said something like this. every times has its own solutions. Today we are growing like never before, questions/problems are different, their answers are also different. obvioulsy older generation finds it tough to relate, and young generation makes it more difficult to relate…
Well, finding answers to various problems is development!
will look forward to next ones in the series!
अनुनाद जी, महेन्द्र मिश्रा जी, टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

उन्मुक्त - प्रयास रहेगा कि इन मुद्दों पर भी कुछ लिख सकूं
ज्ञानदत्त जी -
fact funny- अगर आप स्पेम नही हैं तो आपका स्वागत है।
अखंड - शुक्रिया। रजनीश की कभी सुना/पढा नही..पर लगता है मेरी-उनकी फ्रीक्वेंसी मेच करती है
Good to hear that you have thought of providing insights to the challenges faced/to be faced by India.
Suggested topic: Nitin’s Marriage proposal
मुकुल - और भी गम हैं जमाने में…..