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	<title>Comments on: माइकल क्रिचटान की कुछ पुस्तकें और कूछ इधर उधर की</title>
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	<description>जिन्दगी : सतरंगी रे</description>
	<pubDate>Sun, 20 Jul 2008 22:47:11 +0000</pubDate>
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		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2612</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Aug 2007 12:42:12 +0000</pubDate>
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		<description>भई अपना हाल भी श्रीश वाला ही है पर लेख पढ़ने में बहुत मजा आया  और साथ ही टिप्प्णीयाँ भी।
दे आफ़्टर  तुमारो वाली बात हमारे भी हजम नहीं हुई, प्रदूषण बढ़ने से रातों रात हिम युग आ जायेगा! कैसे?  और हिम युग कैसे आयेगा? अगर आया तो भी जल युग आयेगा, क्यों कि बढ़ते तापमान से बर्फ पिघल कर समुद में मिला जिससे मालदीव जैसे कई टापू दुनियां के नक्शे से गायब हो जायेंगे। 
कैर भाई सुना है पिक्चर खूब चली थी, बेचने वाले तो गंजे को भी कंघी जो बेच देते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भई अपना हाल भी श्रीश वाला ही है पर लेख पढ़ने में बहुत मजा आया  और साथ ही टिप्प्णीयाँ भी।<br />
दे आफ़्टर  तुमारो वाली बात हमारे भी हजम नहीं हुई, प्रदूषण बढ़ने से रातों रात हिम युग आ जायेगा! कैसे?  और हिम युग कैसे आयेगा? अगर आया तो भी जल युग आयेगा, क्यों कि बढ़ते तापमान से बर्फ पिघल कर समुद में मिला जिससे मालदीव जैसे कई टापू दुनियां के नक्शे से गायब हो जायेंगे।<br />
कैर भाई सुना है पिक्चर खूब चली थी, बेचने वाले तो गंजे को भी कंघी जो बेच देते हैं।</p>
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		<title>By: Nitin Bagla</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2601</link>
		<dc:creator>Nitin Bagla</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 18:15:58 +0000</pubDate>
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		<description>अमित- ठीक है..अब लडलम को भी ट्राई करते हैं। वैसे किताबों और उन पर बनी फिल्मों में किताब ही बीस बैठती है, ये खुद हैरी पुत्तर की सीरीज से पता चलता है।

हैरी पाटर V 7 का मसाला साइट्स पर अगले दिन? नही भाई...एक दिन पहले ही(१९-२० जुलाई को)...पूरी किताब मौजूद थी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अमित- ठीक है..अब लडलम को भी ट्राई करते हैं। वैसे किताबों और उन पर बनी फिल्मों में किताब ही बीस बैठती है, ये खुद हैरी पुत्तर की सीरीज से पता चलता है।</p>
<p>हैरी पाटर V 7 का मसाला साइट्स पर अगले दिन? नही भाई&#8230;एक दिन पहले ही(१९-२० जुलाई को)&#8230;पूरी किताब मौजूद थी।</p>
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	</item>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2600</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 10:54:59 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;अमित - तीन किंग साइज़ टिप्पणियों के लिए धन्यवाद&lt;/blockquote&gt;
अजी साहब धन्य्वाद की क्या आवश्यकता, आपकी पोस्ट पसंद आई और मन में आया कि कुछ कहना बनता है तो मैंने टिप्पणी की, नीरज दादा ने सवाल किए तो भी टिप्पणी की। ऐसे ही चलता(चलना चाहिए) है ब्लॉग की दुनिया में। :)

&lt;blockquote&gt;(वैसे इतने सारे भेद लिख दिये हैं यहाँ, कि जिसने पुस्तक ना पढी, और ये टिप्पणियाँ पढ लीं..उसके लिये तो….हो गया बोलो राम।)&lt;/blockquote&gt;
हा हा हा, वैसे इंटरनेट पर तो इससे अधिक मसाला(कि किताब में क्या है, कहानी का क्या हुआ आदि) अगले दिन ही आ गया था, बहुत से लोग किताब लेते ही पढ़ने बैठ गए थे और अनवरत पढ़ इसको फटा-फट समाप्त कर साइटों पर पोस्ट कर दिया था!! ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>अमित - तीन किंग साइज़ टिप्पणियों के लिए धन्यवाद</p></blockquote>
<p>अजी साहब धन्य्वाद की क्या आवश्यकता, आपकी पोस्ट पसंद आई और मन में आया कि कुछ कहना बनता है तो मैंने टिप्पणी की, नीरज दादा ने सवाल किए तो भी टिप्पणी की। ऐसे ही चलता(चलना चाहिए) है ब्लॉग की दुनिया में। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>(वैसे इतने सारे भेद लिख दिये हैं यहाँ, कि जिसने पुस्तक ना पढी, और ये टिप्पणियाँ पढ लीं..उसके लिये तो….हो गया बोलो राम।)</p></blockquote>
<p>हा हा हा, वैसे इंटरनेट पर तो इससे अधिक मसाला(कि किताब में क्या है, कहानी का क्या हुआ आदि) अगले दिन ही आ गया था, बहुत से लोग किताब लेते ही पढ़ने बैठ गए थे और अनवरत पढ़ इसको फटा-फट समाप्त कर साइटों पर पोस्ट कर दिया था!! <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2599</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 10:49:14 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;संयोग की बात…मुझे आजतक राबर्ट लडलम का कोई उपन्यास पढने का मौका नही मिला , हालाँकि जेसन बार्न सीरिज की दोनो फिल्में मुझे पसंद हैं तीसरे भाग का इंतजार है।&lt;/blockquote&gt;
इसके ठीक विपरीत मुझे जेसन बॉर्न सीरीज़ की दोनो ही फिल्में बेकार लगी(कहानी का एक मुख्य पात्र, कारलोस, हटा ही दिया जिसकी वजह से डेविड वेब्ब को जेसन बॉर्न बनना पड़ा, इसलिए फिल्मों की कहानी और मैट डैमोन का अभिनय वाहियात लगा), आप तीनो उपन्यास पढ़िए इस सीरीज़ के तो आपको समझ आ जाएगा। :) वैसे इस सीरीज़ का चौथा उपन्यास "The Bourne Legacy" एकाध वर्ष पहले ही आया था जिसको रॉबर्ट लडलम ने नहीं लिखा था लेकिन मूल आधार उन्हीं का था। वैसे तो कुछ खास नहीं था वो उपन्यास, खासतौर से यदि मूल उपन्यासों के मुकाबले देखें, लेकिन फिर भी एक बार पढ़ने लायक ही सही!! ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>संयोग की बात…मुझे आजतक राबर्ट लडलम का कोई उपन्यास पढने का मौका नही मिला , हालाँकि जेसन बार्न सीरिज की दोनो फिल्में मुझे पसंद हैं तीसरे भाग का इंतजार है।</p></blockquote>
<p>इसके ठीक विपरीत मुझे जेसन बॉर्न सीरीज़ की दोनो ही फिल्में बेकार लगी(कहानी का एक मुख्य पात्र, कारलोस, हटा ही दिया जिसकी वजह से डेविड वेब्ब को जेसन बॉर्न बनना पड़ा, इसलिए फिल्मों की कहानी और मैट डैमोन का अभिनय वाहियात लगा), आप तीनो उपन्यास पढ़िए इस सीरीज़ के तो आपको समझ आ जाएगा। <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> वैसे इस सीरीज़ का चौथा उपन्यास &#8220;The Bourne Legacy&#8221; एकाध वर्ष पहले ही आया था जिसको रॉबर्ट लडलम ने नहीं लिखा था लेकिन मूल आधार उन्हीं का था। वैसे तो कुछ खास नहीं था वो उपन्यास, खासतौर से यदि मूल उपन्यासों के मुकाबले देखें, लेकिन फिर भी एक बार पढ़ने लायक ही सही!! <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /></p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: उन्मुक्त</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2598</link>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 00:09:03 +0000</pubDate>
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		<description>नितन जी क्राईटन मेरे प्रिय लेखकों में से थे इसलिये लगभग सब पुस्तक पढ़ डाली थी। नीयत से शक का मतलब केवल यह है कि यह पुस्तक किसी लॉबी के दबाव में लिखी गयी लगती है। इसमें उनके विचार biased हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नितन जी क्राईटन मेरे प्रिय लेखकों में से थे इसलिये लगभग सब पुस्तक पढ़ डाली थी। नीयत से शक का मतलब केवल यह है कि यह पुस्तक किसी लॉबी के दबाव में लिखी गयी लगती है। इसमें उनके विचार biased हैं।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Nitin Bagla</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2597</link>
		<dc:creator>Nitin Bagla</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Aug 2007 17:01:38 +0000</pubDate>
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		<description>उन्मुक्त जी, लगता है आपने तो सारी पुस्तकें पढ रखी हैं क्रिच्टान की? वैसे State of Fear में नीयत पर शक का मतलब नही समझा मैं? जरा विस्तार से समझायेंगे...प्लीsssज़...

नीरज भाई - टिप्पणी का धन्यवाद। कोई सीधा साधा आदमी उस पंक्ति को पढता (जिसने हैरी पाटर ना पढी हो)...तो सबसे सरल अर्थ निकालता, हैरी के बच्चे, हरमाइनी के बच्चे और हैरी के बच्चे...पर आप ठहरे....आप(बोले तो मीडिया वाले :) )...सो अनर्थ कर ही दिया :) खैर..आगे अमित ने विस्तार से पूरी कहानी लिख ही दी है, सो कुछ लिखने की गुंजाइश नही बची.. 


अमित - तीन किंग साइज़ टिप्पणियों के लिए धन्यवाद :)
संयोग की बात...मुझे आजतक राबर्ट लडलम का कोई उपन्यास पढने का मौका नही मिला , हालाँकि जेसन बार्न सीरिज की दोनो फिल्में मुझे पसंद हैं तीसरे भाग का इंतजार है। और अलबस सेवेरस पाटर का भी :)

प्रमुख पात्र से मेरा मंतव्य तीनों दोस्तों की तिकडी में से किसी की मौत ना होने से था...जिसके कि खूब कयास लगाये जा रहे थे...बाकी तो आपने व्याख्या कर ही दी है।(वैसे इतने सारे भेद लिख दिये हैं यहाँ, कि जिसने पुस्तक ना पढी, और ये टिप्पणियाँ पढ लीं..उसके लिये तो....हो गया बोलो राम।)

ज्ञानदत्त जी, आपकी गाडी आज यहाँ रुकी, अच्छा लगा...आते रहा कीजिये। (वैसे फीड ले ली है...का मतलब होम डिलिवरी टाइप होता है)

श्रीश- पतली गली क्यों जी, पूरा रस्ता आपका है :) फिर आइयेगा

आलोक - खालिद हुसेनी की कोई पुस्तक अभी तक नही पढी भाई....

संजय भाई- अभी का पढा तो सिर्फ ’नेक्स्ट’ है इनमें..बाकी तो पुरानी उपलब्धियां हैं (फाल्तू टाइप के इंसान है जी)। प्रदूषण बिल्कुल माफी लायक नही...कडी से कडी सजा दी जाये...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>उन्मुक्त जी, लगता है आपने तो सारी पुस्तकें पढ रखी हैं क्रिच्टान की? वैसे State of Fear में नीयत पर शक का मतलब नही समझा मैं? जरा विस्तार से समझायेंगे&#8230;प्लीsssज़&#8230;</p>
<p>नीरज भाई - टिप्पणी का धन्यवाद। कोई सीधा साधा आदमी उस पंक्ति को पढता (जिसने हैरी पाटर ना पढी हो)&#8230;तो सबसे सरल अर्थ निकालता, हैरी के बच्चे, हरमाइनी के बच्चे और हैरी के बच्चे&#8230;पर आप ठहरे&#8230;.आप(बोले तो मीडिया वाले <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> )&#8230;सो अनर्थ कर ही दिया <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> खैर..आगे अमित ने विस्तार से पूरी कहानी लिख ही दी है, सो कुछ लिखने की गुंजाइश नही बची.. </p>
<p>अमित - तीन किंग साइज़ टिप्पणियों के लिए धन्यवाद <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
संयोग की बात&#8230;मुझे आजतक राबर्ट लडलम का कोई उपन्यास पढने का मौका नही मिला , हालाँकि जेसन बार्न सीरिज की दोनो फिल्में मुझे पसंद हैं तीसरे भाग का इंतजार है। और अलबस सेवेरस पाटर का भी <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>प्रमुख पात्र से मेरा मंतव्य तीनों दोस्तों की तिकडी में से किसी की मौत ना होने से था&#8230;जिसके कि खूब कयास लगाये जा रहे थे&#8230;बाकी तो आपने व्याख्या कर ही दी है।(वैसे इतने सारे भेद लिख दिये हैं यहाँ, कि जिसने पुस्तक ना पढी, और ये टिप्पणियाँ पढ लीं..उसके लिये तो&#8230;.हो गया बोलो राम।)</p>
<p>ज्ञानदत्त जी, आपकी गाडी आज यहाँ रुकी, अच्छा लगा&#8230;आते रहा कीजिये। (वैसे फीड ले ली है&#8230;का मतलब होम डिलिवरी टाइप होता है)</p>
<p>श्रीश- पतली गली क्यों जी, पूरा रस्ता आपका है <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> फिर आइयेगा</p>
<p>आलोक - खालिद हुसेनी की कोई पुस्तक अभी तक नही पढी भाई&#8230;.</p>
<p>संजय भाई- अभी का पढा तो सिर्फ ’नेक्स्ट’ है इनमें..बाकी तो पुरानी उपलब्धियां हैं (फाल्तू टाइप के इंसान है जी)। प्रदूषण बिल्कुल माफी लायक नही&#8230;कडी से कडी सजा दी जाये&#8230;</p>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2596</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Aug 2007 11:17:43 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;आपने बताया जो कि हरमाइनी रॉन से ब्याही है। ये सुनकर अच्छा नहीं लगा। हरीपुत्र से होता तो जमता :) क्या करें. भई.. हिन्दुस्तानी सोच जो है।&lt;/blockquote&gt;
दादा, इस कहानी को शुरु से(बड़ी हद चौथी किताब) से पढ़ने पर सीधे ही यह अहसास हो जाता है कि हैरी को कभी हरमाएओनी की ओर आकर्षण रहा ही नहीं और न ही हरमाएओनी को हैरी के प्रति। हैरी को शुरु से चो चैंग के प्रति आकर्षण रहा है, पाँचवीं किताब में वह आकर्षण टूट जाता है और छठी में उसको एहसास होता है कि वह जिन्नी(जो कि आरंभ से ही उसको चाहती आई है) से प्यार करता है। इसलिए इन दोनों का ही विवाह स्भाविक लग रहा था। सेवेरस स्नेप के प्रति बहुत सी धारणाएँ गलत साबित हुई, वह वाकई में एक अच्छा इंसान था(लेकिन जानबूझकर अपनी गलत छवि प्रक्षेपित करता था) और यह बात हैरी को स्नेप के मरने के बाद तब समझ आती है जब वो स्नेप की स्मृति में जाकर उसको जानता है(अभी तक तो असल में जानता ही नहीं था) और इसलिए वह अपने दूसरे बेटे का नाम डंबलडोर और स्नेप के नाम पर एल्बस सेवेरस पॉटर रखता है, हॉगवर्ट्स के हेडमास्टर रहे दो महान व्यक्ति जिन्होंने हैरी के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान की।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>आपने बताया जो कि हरमाइनी रॉन से ब्याही है। ये सुनकर अच्छा नहीं लगा। हरीपुत्र से होता तो जमता <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> क्या करें. भई.. हिन्दुस्तानी सोच जो है।</p></blockquote>
<p>दादा, इस कहानी को शुरु से(बड़ी हद चौथी किताब) से पढ़ने पर सीधे ही यह अहसास हो जाता है कि हैरी को कभी हरमाएओनी की ओर आकर्षण रहा ही नहीं और न ही हरमाएओनी को हैरी के प्रति। हैरी को शुरु से चो चैंग के प्रति आकर्षण रहा है, पाँचवीं किताब में वह आकर्षण टूट जाता है और छठी में उसको एहसास होता है कि वह जिन्नी(जो कि आरंभ से ही उसको चाहती आई है) से प्यार करता है। इसलिए इन दोनों का ही विवाह स्भाविक लग रहा था। सेवेरस स्नेप के प्रति बहुत सी धारणाएँ गलत साबित हुई, वह वाकई में एक अच्छा इंसान था(लेकिन जानबूझकर अपनी गलत छवि प्रक्षेपित करता था) और यह बात हैरी को स्नेप के मरने के बाद तब समझ आती है जब वो स्नेप की स्मृति में जाकर उसको जानता है(अभी तक तो असल में जानता ही नहीं था) और इसलिए वह अपने दूसरे बेटे का नाम डंबलडोर और स्नेप के नाम पर एल्बस सेवेरस पॉटर रखता है, हॉगवर्ट्स के हेडमास्टर रहे दो महान व्यक्ति जिन्होंने हैरी के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान की।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: sanjay bengani</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2595</link>
		<dc:creator>sanjay bengani</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Aug 2007 10:34:23 +0000</pubDate>
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		<description>आपको इतना समय मिला की इतना कुछ पढ़ गए, बधाई हो. 

है सकता है जलवायु के बदलाव हौआ हो, मगर बढ़ता प्रदुषण माफी के लायक नहीं. शायद डर कर ही इंसान समझ जाये. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपको इतना समय मिला की इतना कुछ पढ़ गए, बधाई हो. </p>
<p>है सकता है जलवायु के बदलाव हौआ हो, मगर बढ़ता प्रदुषण माफी के लायक नहीं. शायद डर कर ही इंसान समझ जाये. <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Alok</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2594</link>
		<dc:creator>Alok</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Aug 2007 10:33:10 +0000</pubDate>
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		<description>Thougfh i have not read all , just terminal man and congo but in both the pace was too slow and dragging.Ye bata ki khalid hosseni ki nayi book padhi ki nahin, padh li to bata paise lagane layak hai ki nahin.
Generally after the brillian novel it is followed by a mediocre work( my feeling eg chetan bhagat)..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Thougfh i have not read all , just terminal man and congo but in both the pace was too slow and dragging.Ye bata ki khalid hosseni ki nayi book padhi ki nahin, padh li to bata paise lagane layak hai ki nahin.<br />
Generally after the brillian novel it is followed by a mediocre work( my feeling eg chetan bhagat)..</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: नीरज दीवान</title>
		<link>http://saptrang.wordpress.com/2007/08/05/michale-crichton-ki-pustakem-aur-idhar-udhar-ki/#comment-2593</link>
		<dc:creator>नीरज दीवान</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Aug 2007 10:29:44 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत बढ़िया तरीक़े से जानकारी दिए हो अमित भाई. मुझे हरिपुत्र बहोत प्रिय है। इसलिए अगले उपन्यास को लेकर उत्सुकता थी। आपने बताया जो कि हरमाइनी रॉन से ब्याही है। ये सुनकर अच्छा नहीं लगा। हरीपुत्र से होता तो जमता :) क्या करें. भई.. हिन्दुस्तानी सोच जो है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत बढ़िया तरीक़े से जानकारी दिए हो अमित भाई. मुझे हरिपुत्र बहोत प्रिय है। इसलिए अगले उपन्यास को लेकर उत्सुकता थी। आपने बताया जो कि हरमाइनी रॉन से ब्याही है। ये सुनकर अच्छा नहीं लगा। हरीपुत्र से होता तो जमता <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> क्या करें. भई.. हिन्दुस्तानी सोच जो है।</p>
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