माइकल क्रिचटान की कुछ पुस्तकें और कूछ इधर उधर की
August 5, 2007 by Nitin Bagla
जरा सोंचिये, कैसा लगेगा अगर कोई आपसे कहे , कि आपके शरीर में एक विशेष जीन (Gene) मौजूद है, लेकिन…आप का उस पर कोई अधिकार नही। वो इसलिये, कि कोई बहुराष्ट्रीय बायोटेक कम्पनी अथवा अनुसंधानकर्ता उस जीन को पेटेन्ट करा चुके हैं। जब आपको ये पता चले कि उस जीन पर आपका स्वामित्त्व तो है ही नही…और तो और, वो कम्पनी आपसे वो जीन छीन सकती है, चूंकि वो जीन उसकी संपत्ती है और आप चोरी का माल अपने शरीर में लिये चल रहे हैं(!!!) और आपसे ही नही..आपके बच्चों, पोतों से भी। जरा सोंचिये, आप किसी ब्लड बैंक को अपना रक्त दान करते हैं….और कोई सिरफिरा वैज्ञानिक आपके रक्त को चिम्पांजी से क्रास करवा के कपि-मानव को जन्म दे देता है। वो आपकी संतान होगी या नही? उसके अधिकार, समाज में स्थान क्या होंगे? चूंकि Humon Genome पूरा पढा चुका है, तो ये जानकर कितना अजीब लगता है कि संसार की सभी प्रजातियों में बमुश्किल हजार-पाँच सौ genes का ही फर्क है?
ऐसे ही कुछ सवाल खडे करती है माइकल क्रिचटान (Michael Crichton) के नई विज्ञान फंतांसी “नेक्स्ट” (Next)। बायोटेक्नालाजी के क्षेत्र में जिस रफ्तार से परिवर्तन और खोजें हो रही हैं..और उनको लेकर जो कानूनी एवं सामाजिक दांवपेंच पैदा हो रहे हैं/हो सकते हैं…उन पर भी ये पुस्तक एक नजर डालती है। विषय नया था इसलिये पढना बनता था, लेकिन क्रिचटान के पुराने उपन्यासों की तुलना में इसने मुझे बहुत निराश किया। गति, रहस्य , रोमांच, कहानी का फैलाव और फिर उसे समेटना….किसी भी दृष्टि से मुझे उपन्यास पसंद नही आया, या ये कहें कि क्रिचटान के लेवल का नही था, सिवाय विषय की नवीनता के। कहानी में ३-४ प्लाट एक साथ चलते हैं…एक बडी बायोटेक कंपनी और उसके द्वारा छल से पेटेंट कराई हुई जीन, जीन के मालिक का दूसरी कंपनी के साथ मिलना और इस सिलसिले में अपनी बेटी और पोते की जान खतरे में डालना, एक बोलने वाला तोता और कपि-मानव आदि आदि। अंत में उनका घालमेल करके उन्हे एक जगह पर लाकर समेटने की कोशिश की गई है..पर उपन्यास की रफ्तार बहुत धीमी है। अगर इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं तो पढें अन्यथा छोडा भी जा सकता है।
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Michael Crichton का पिछला उपन्यास था “स्टेट आफ फीयर” (State of Fear) । यह उपन्यास जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की पृष्ठभूमि पर आधारित था, और मैने ऐसा फिक्शन पहली बार पढा था, जिसमें लेखक ने हर तर्क के रेफ़ेरेन्स तक दिये थे, बाकायदा जर्नल्स , शोध पत्रों और पुस्तकों के। संयोग से उपन्यास जब पढा था उस समय जलवायु परिवर्तन मेरे पी. जी. कोर्स में एक क्रेडिट कोर्स का इलेक्टिव था जो मैने लिया था। कक्षा की पढाई, और उपन्यास द्वारा जलवायु परिवर्तन के हौवे की धज्जी उडाई (बकायदा वैज्ञानिक शोधों के पत्रों के रेफेरेन्सेज देकर), एक समय में हो रहे थे..और मैने इस उपन्यास का भरपूर आनंद लिया था। एक तेज रफ्तार, Out of the box thinking वाला उपन्यास, अगर कभी हाथ लगे तो जरूर पढियेगा….पढने के बाद ऐसा लगने लगता है…कि जो हो रहा है, सब प्रकृति के द्वार किये जा रहे सतत परिवर्तन का एक हिस्सा है…और जलवायु परिवर्तन एक हौवा ही है।
जलवायु परिवर्तन की ही बात चली, तो एक फिल्म Day After Tomorrow भी मैने लगभग इसी समय देखी थी। उपन्यास के ठीक उलट ,निर्देशक Ronald Emmerich ये फिल्म वो भयावह दृश्य सामने लाती है, जिसके बारे में सिर्फ किताबों में पढा है…और सोंचा है, कि जब वो होगा, तो कैसे होगा। जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप किस तरह से अचानक समुद्र का जलस्तर बढ जायेगा, तटीय इलाके डूब जायेंगे। फिल्म बताती है, कि इसके फलस्वरूप एक नये हिमयुग की शुरुआत होगी, भारी जानमाल की हानि तो होगी, लेकिन पृथ्वी का काफी हिस्सा बर्फ में दब जायेगा। फिल्म के नायक Dennis Quaid की एक पंक्ति मुझे बहुत आशांवित करती है, “मानव जाति पिछले हिमयुग को पार कर गयी थी, और परिस्थितियों के अनुसार ढल कर इस हिमयुग को भी पार कर लेगी”। कभी मौका लगे , तो ये फिल्म भी जरूर देखियेगा। (हालांकि फिल्म के कान्सेप्ट की जम कर आलोचना हुई थी, चूंकि ये वैज्ञानिक धरातल पर कहीं सही नही बैठता, पर साहब…वैज्ञानिक धरातल पर तो आजतक ी मौसम का पूर्वानुमान भी ठीक नही बैठा….. )
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Michael Crichton के ही एक अन्य उपन्यास (शायद जुरासिक पार्क या लास्ट वर्ल्ड) के प्राक्कथन में वो कहते हैं कि पृथ्वी के बनने से अबतक पैदा हुई जीव जंतुओं की प्रजातियों (species) में से ९९% विलुप्त (extinct) हो चुकी हैं, और मात्र १ % बची हैं…संसार में हर रोज हजारों species विलुप्त होती हैं..और कई जन्म लेती हैं..ये चक्र चलता ही रहता है। ये कथन कितना सही है ये तो नही मालूम…लेकिन ये जानता हूँ कि अपने वातावरण से जिसने जितना सामन्जस्य बिठा लिया, वो उतना ही ज्यादा जियेगा। शायद इसी को परिस्थितियों के अनुसार ढलना, परिवर्तन और बदलाव को समझना कहते हैं। मेरे खयाल में मानव प्रजाति की यही खूबी उसे पृथ्वी पर इतना लंबा टिका सकी है।
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नब्बे के दशक में, जब हम बच्चे/किशोर थे, एक बात हम दोस्तों में बहुत चर्चा का विषय हुआ करती थी..वो ये कि सन २००० में दुनिया खत्म हो जायेगी, प्रलय आ जायेगी..आदि आदि। नास्त्रेदमस की भविष्य़वाणियां नुमां किताबें भी खूब पढी थीं..अक्सर सोंचा करते थे कि प्रलय आयेगी तो क्या होगा? अफसोस ऐसा कुछ हुआ नही…। पर अब मैं ऐसा नही सोंचता (मैं बडा हो गया हूँ..बार्नवीटा भी नही पीता
)।
समझ में काफी फर्क आया है। ये तो अब भी लगता है, कि परिवर्तन जिस गति से हो रहा है, किसी दिन जोर का झटका, धीरे से जरूर लगेगा, समुद्री जलस्तर या तापमान में अचानक कमी-बेसी, प्राकृतिक विपदा कुछ भी..लेकिन मुझे इतना विश्वास है कि मानव जाति इन सबसे पार पा जायेगी..और अगली पीढी फिर एक नया गीत गुनगुनायेगी । हो सकता है प्रकृति अपना संतुलन बनाये रखने के लिये कोई कडा कदम उठाये और हम और आप में से कई ना रहें …लेकिन जितने बचेंगे…वो काफी होंगे जिंदगी की मशाल को आगे वालों के हाथ में देने के लिये। शायद वो लोग इससे सबक भी लेंगे और २-४ हजार साल तक फिर धरती पर अमन चैन रहे (इंसान के होते हुए अमन चैन वैसे विरोधाभास है), लेकिन मनुष्य का समय के साथ खुद को बदल लेने का जज्बा उसे लम्बी रेस का घोडा बनाता है, इसमें कोई शक नही।
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किताबों की बात हुई, तो ये भी जोड ही दें कि हैरी पुत्तर (V 7.0) भी पढ ही लिये मैने पिछले दिनों..| आशानुरूप, हैरी भी एक हार्क्रक्स निकला (बोले तो राक्षस की जान का एक हिस्सा कई तोतों के अलावा हैरी के अन्दर भी था), और कोई मुख्य पात्र मरा नही..सब कुछ ठीक ठाक निपट गया। हाँ ये जरूर सरप्राइज रहा कि JKR ने कहानी १९ साल आगे ले जाकर छोडी…हैरी,हरमाइनी, और रोन के बच्चों के पास। अब इसका अगला भाग आता ये या नही देखना है, वैसे ऐसी कोई घोषणा या खंडन हुआ नही अब तक, किताब के प्रकाशित होने के बाद से।
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चलते चलते, आप सबको दोस्ती का दिन बहुत बहुत मुबारक। बात बहुत दूर तक निकल आयी….फिलहाल आप अपनी जीन्स(Genes वाली जीन्स, Jeans नही) बचा कर रखिये…या ऐसे करें कि वक्ती तौर पर ब्लागिंग की, या दोस्ती की ही, Genes सबको Inject करें :). ..बहुत जरूरत है आजकल दुनिया को।

मुझे Jurasic Park के साथ माईकल क्राईटन की The Andromeda strain, The Terminal Man, Congo, Rising Sun, Eletronic Life, Timeline बहुत अच्छी लगी थी। लेकिन बाद की पुस्तकों ने तो निराश किया। शायद यह सब उनकी पुस्तक Travels के बाद शुरू हुआ। इसको पढ़ने से लगता था कि वे supernatural में विश्वास करने लगे हैं। State of Fear पर तो मुझे उनकी नीयत पर भी शक होता है। मैंने उन्हें अब पढ़ना छोड़ दिया।
माइकल क्रिच्टान और वो भी हिन्दी में! भई वाह
ये हुई ना बात मज़े से लिखा और मज़े से पढ़ा रहे हो।
यार हरिपुत्र का नया उपन्यास तो पढ़ा नहीं इसलिए पता नहीं किंतु ”हैरी, हरमाइनी और रॉन के बच्चों”.. उई.. ये क्या है? किसकी किसके साथ हुई ये सब तय करो तफसील से..अन्यथा अनर्थ निकल रहा है।
भई माइकल क्रिचटन को तो मैं पढता ही नहीं, एक बार लॉस्ट वर्ल्ड पढ़ना शुरु किया था कई वर्ष पहले और कुछ पन्ने पढ़ ही इतनी बोरियत सी होने लगी कि उपन्यास छोड़ दिया और बाद में कभी उनका कोई उपन्यास नहीं पढ़ा। आजकल रॉबर्ट लडलम का गेल लिंड्स द्वारा लिखा उपन्यास “द पैरिस ऑप्शन” चल रहा है, कुछ ही पन्ने पढ़े हैं, देखें कब तक पूरा होता है।
हैरी पॉटर को तो 22 जुलाई को ही निपटा दिया था, 21 जुलाई सांय काल किताब घर पर डिलिवर हो गई थी, रात ही रात में उसको निपटा दिया गया!!
देखें, आशा तो मै भी रखे हुए हूँ कि आगे भी रोलिंग इस कड़ी को बढ़ाए, लेकिन लगता नहीं है क्योंकि वह स्वयं बहुत बात कह चुकी हैं कि आगे इस कड़ी को नहीं बढ़ाया जाएगा। वैसे मैं यह सोचता हूँ कि इस कड़ी को आगे न बढ़ाना व्यवसायिक दृष्टि से मूर्खता ही होगी, बाकी आगे क्या होता है यह तो भविष्य के गर्भ में है जो कि समय आने पर ही पता चलेगा।
दादा, हैरी की शादी हुई रॉन की बहन जिन्नी से और उनके हुए 3 बच्चे; जेम्स, एल्बस और लिली। रॉन की शादी हुई हरमाएओनी से और उनके हुए 2 बच्चे; रोज़ और हूगो। ड्रैको मैल्फॉय का एक बालक दिखाया; स्कोर्पिअस, जो कि उम्र में एल्बस और रोज़ के बराबर है। नितिन जी ने कहा कि इसमें किसी मुख्य पात्र की मृत्यु नहीं हुई, लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि इसमें हैरी के आसपास मंडराने वाले महत्वपूर्ण पात्र(जिनमें मुख्य भी हैं) इस क्रम में मृत्यु को प्राप्त हुए:
१) हेडविग (हैरी का उल्लू)
२) मैड आई मूडी
३) फ्रेड वीज़ली (रॉन का भाई, जॉर्ज का जुड़वा)
४) सेवेरस स्नेप
५) रेमस लूपिन (हैरी का भूतपूर्व अध्यापक और हैरी के पिता का मित्र) और उसकी पत्नी टाँक्स
६) लॉर्ड वोल्डीमोर्ट
इसमें बताया गया कि लूपिन और टाँक्स का विवाह हो जाता है और उनके एक लड़का पैदा होता है, लूपिन हैरी को उसका गॉडफादर बनाता है। शिशु के पैदा होने के कुछ ही दिन बाद वोल्डीमोर्ट और उसके डेथ ईटरों से अंतिम लड़ाई छिड़ती है हॉगवर्ट्स के मैदान में जहाँ लूपिन सपत्नीक शहीद हो जाता है।
बहुत दिनो से आपके ब्लॉग पर चक्कर नहीं मारा - गलती मेरी. अब देखो न, आज कितनी सामग्री से 2-4 हुआ. मजे की बात है इनमें से एक के बारे में भी मैं नहीं जानता था!
बस भैया आपके ब्लॉग की फीड अब संजो ली है. सारी गलती एग्रीगेटर पर कम जाने से हुई.
यहाँ पढ़ाकुऔं के बीच में मैं खुद को अल्पसंख्यक फील कर रहा हूँ, पतली गली से निकल लेता हूँ।

बहुत बढ़िया तरीक़े से जानकारी दिए हो अमित भाई. मुझे हरिपुत्र बहोत प्रिय है। इसलिए अगले उपन्यास को लेकर उत्सुकता थी। आपने बताया जो कि हरमाइनी रॉन से ब्याही है। ये सुनकर अच्छा नहीं लगा। हरीपुत्र से होता तो जमता
क्या करें. भई.. हिन्दुस्तानी सोच जो है।
Thougfh i have not read all , just terminal man and congo but in both the pace was too slow and dragging.Ye bata ki khalid hosseni ki nayi book padhi ki nahin, padh li to bata paise lagane layak hai ki nahin.
Generally after the brillian novel it is followed by a mediocre work( my feeling eg chetan bhagat)..
आपको इतना समय मिला की इतना कुछ पढ़ गए, बधाई हो.
है सकता है जलवायु के बदलाव हौआ हो, मगर बढ़ता प्रदुषण माफी के लायक नहीं. शायद डर कर ही इंसान समझ जाये.
दादा, इस कहानी को शुरु से(बड़ी हद चौथी किताब) से पढ़ने पर सीधे ही यह अहसास हो जाता है कि हैरी को कभी हरमाएओनी की ओर आकर्षण रहा ही नहीं और न ही हरमाएओनी को हैरी के प्रति। हैरी को शुरु से चो चैंग के प्रति आकर्षण रहा है, पाँचवीं किताब में वह आकर्षण टूट जाता है और छठी में उसको एहसास होता है कि वह जिन्नी(जो कि आरंभ से ही उसको चाहती आई है) से प्यार करता है। इसलिए इन दोनों का ही विवाह स्भाविक लग रहा था। सेवेरस स्नेप के प्रति बहुत सी धारणाएँ गलत साबित हुई, वह वाकई में एक अच्छा इंसान था(लेकिन जानबूझकर अपनी गलत छवि प्रक्षेपित करता था) और यह बात हैरी को स्नेप के मरने के बाद तब समझ आती है जब वो स्नेप की स्मृति में जाकर उसको जानता है(अभी तक तो असल में जानता ही नहीं था) और इसलिए वह अपने दूसरे बेटे का नाम डंबलडोर और स्नेप के नाम पर एल्बस सेवेरस पॉटर रखता है, हॉगवर्ट्स के हेडमास्टर रहे दो महान व्यक्ति जिन्होंने हैरी के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान की।
उन्मुक्त जी, लगता है आपने तो सारी पुस्तकें पढ रखी हैं क्रिच्टान की? वैसे State of Fear में नीयत पर शक का मतलब नही समझा मैं? जरा विस्तार से समझायेंगे…प्लीsssज़…
नीरज भाई - टिप्पणी का धन्यवाद। कोई सीधा साधा आदमी उस पंक्ति को पढता (जिसने हैरी पाटर ना पढी हो)…तो सबसे सरल अर्थ निकालता, हैरी के बच्चे, हरमाइनी के बच्चे और हैरी के बच्चे…पर आप ठहरे….आप(बोले तो मीडिया वाले
)…सो अनर्थ कर ही दिया
खैर..आगे अमित ने विस्तार से पूरी कहानी लिख ही दी है, सो कुछ लिखने की गुंजाइश नही बची..
अमित - तीन किंग साइज़ टिप्पणियों के लिए धन्यवाद
संयोग की बात…मुझे आजतक राबर्ट लडलम का कोई उपन्यास पढने का मौका नही मिला , हालाँकि जेसन बार्न सीरिज की दोनो फिल्में मुझे पसंद हैं तीसरे भाग का इंतजार है। और अलबस सेवेरस पाटर का भी
प्रमुख पात्र से मेरा मंतव्य तीनों दोस्तों की तिकडी में से किसी की मौत ना होने से था…जिसके कि खूब कयास लगाये जा रहे थे…बाकी तो आपने व्याख्या कर ही दी है।(वैसे इतने सारे भेद लिख दिये हैं यहाँ, कि जिसने पुस्तक ना पढी, और ये टिप्पणियाँ पढ लीं..उसके लिये तो….हो गया बोलो राम।)
ज्ञानदत्त जी, आपकी गाडी आज यहाँ रुकी, अच्छा लगा…आते रहा कीजिये। (वैसे फीड ले ली है…का मतलब होम डिलिवरी टाइप होता है)
श्रीश- पतली गली क्यों जी, पूरा रस्ता आपका है
फिर आइयेगा
आलोक - खालिद हुसेनी की कोई पुस्तक अभी तक नही पढी भाई….
संजय भाई- अभी का पढा तो सिर्फ ’नेक्स्ट’ है इनमें..बाकी तो पुरानी उपलब्धियां हैं (फाल्तू टाइप के इंसान है जी)। प्रदूषण बिल्कुल माफी लायक नही…कडी से कडी सजा दी जाये…
नितन जी क्राईटन मेरे प्रिय लेखकों में से थे इसलिये लगभग सब पुस्तक पढ़ डाली थी। नीयत से शक का मतलब केवल यह है कि यह पुस्तक किसी लॉबी के दबाव में लिखी गयी लगती है। इसमें उनके विचार biased हैं।
इसके ठीक विपरीत मुझे जेसन बॉर्न सीरीज़ की दोनो ही फिल्में बेकार लगी(कहानी का एक मुख्य पात्र, कारलोस, हटा ही दिया जिसकी वजह से डेविड वेब्ब को जेसन बॉर्न बनना पड़ा, इसलिए फिल्मों की कहानी और मैट डैमोन का अभिनय वाहियात लगा), आप तीनो उपन्यास पढ़िए इस सीरीज़ के तो आपको समझ आ जाएगा।
वैसे इस सीरीज़ का चौथा उपन्यास “The Bourne Legacy” एकाध वर्ष पहले ही आया था जिसको रॉबर्ट लडलम ने नहीं लिखा था लेकिन मूल आधार उन्हीं का था। वैसे तो कुछ खास नहीं था वो उपन्यास, खासतौर से यदि मूल उपन्यासों के मुकाबले देखें, लेकिन फिर भी एक बार पढ़ने लायक ही सही!! 
अजी साहब धन्य्वाद की क्या आवश्यकता, आपकी पोस्ट पसंद आई और मन में आया कि कुछ कहना बनता है तो मैंने टिप्पणी की, नीरज दादा ने सवाल किए तो भी टिप्पणी की। ऐसे ही चलता(चलना चाहिए) है ब्लॉग की दुनिया में।
हा हा हा, वैसे इंटरनेट पर तो इससे अधिक मसाला(कि किताब में क्या है, कहानी का क्या हुआ आदि) अगले दिन ही आ गया था, बहुत से लोग किताब लेते ही पढ़ने बैठ गए थे और अनवरत पढ़ इसको फटा-फट समाप्त कर साइटों पर पोस्ट कर दिया था!!
अमित- ठीक है..अब लडलम को भी ट्राई करते हैं। वैसे किताबों और उन पर बनी फिल्मों में किताब ही बीस बैठती है, ये खुद हैरी पुत्तर की सीरीज से पता चलता है।
हैरी पाटर V 7 का मसाला साइट्स पर अगले दिन? नही भाई…एक दिन पहले ही(१९-२० जुलाई को)…पूरी किताब मौजूद थी।
भई अपना हाल भी श्रीश वाला ही है पर लेख पढ़ने में बहुत मजा आया और साथ ही टिप्प्णीयाँ भी।
दे आफ़्टर तुमारो वाली बात हमारे भी हजम नहीं हुई, प्रदूषण बढ़ने से रातों रात हिम युग आ जायेगा! कैसे? और हिम युग कैसे आयेगा? अगर आया तो भी जल युग आयेगा, क्यों कि बढ़ते तापमान से बर्फ पिघल कर समुद में मिला जिससे मालदीव जैसे कई टापू दुनियां के नक्शे से गायब हो जायेंगे।
कैर भाई सुना है पिक्चर खूब चली थी, बेचने वाले तो गंजे को भी कंघी जो बेच देते हैं।