१ करोड पाउण्ड की सुरक्षा धरी रह गयी!
July 18, 2007 by Nitin Bagla
एल्लो…इतना हल्ला कर रहे थे हैरी भैया की नई किताब का। पूरा माहौल बना कर तैयार किया हुआ है २१ जुलाई के लिये..कि किताब रिलीज होगी, पढेंगे, ये होगा, वो होगा, हैरी बचेगा..मर जायेगा ..पता नही क्या क्या। हैरी पाटर श्रॄंखला की आखिरी किताब Harry Potter and the Deathly Hallows अपने समय की सबसे ज्यादा प्रतीक्षित पुस्तक है(शायद सबसे ज्यादा Hyped भी).. और खबर मिली है कि किताब लीक हो गई है, और इसका का नरम संस्करण (बोले तो Soft Copy) अंतरजाल पर मौजूद है। और आज नही…कई दिन पहले से।
१ करोड पाउण्ड खर्च किये गये थे किताब की सुरक्षा पर, कि कहीं लीक ना हो जाये। और ये हश्र हुआ इतनी भारी सुरक्षा का। दर्जनों सुरक्षा कर्मी, सेटेलाइट ट्रेकिंग सिस्टम और कई कानूनी दांव पैंच लगाये गये थे। २ लाख प्रतियों का अग्रिम आदेश है प्रकाशकों के पास, और २१ तारीख को किताब की होम डिलिवरी के लिये काफी इन्तजाम भी किये गये बताते हैं। तमाम तरह के कयास लगाये जा रहे हैं थे किताब के Climax को लेकर..पर ये क्या..सब धरा रह गया।
फिर वही सवाल, कि क्या इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी में किसी भी प्रकार की पाइरेसी(संगीत, फिल्म, किताबें आदि) से बचना लगभग नामुम्किन हो चुका है? हालांकि किताब हाथ में लेकर पढने में जो मजा है (बिस्तर पर लेट कर या कुर्सी पर अधलेटे होकर), वो अनुभव e-book कतई नही दे सकती। किताब के पन्नों की खुश्बू का एक अलग ही मजा, एक नशा होता है। पर, जब किताब ९७५/- रुपये की हो, तो फिर ये-क्यों-लें-वो-ना-लें? वाली बात दिमाग में आ जाती है और पाइरेसी, नैतिकता ताक पर धरे रह जाते हैं। तो किताब की बिक्री पर असर तो जरूर पडेगा..पर मुझे लगता है ज्यादा नही (भई २ लाख प्रतियां तो पहले ही बिक गईं)।
पर जो तरीके से पैसे देकर २१ तारीख को किताब का इंतजार कर रहा है, उसका क्या? उसे तो जरूर बुरा लगेगा।

भई जो खरीद कर पढ़ सकता है, वह खरीदेगा ही. जो नहीं खरीद सकता उसका भी भला हो ही गया है. सुरक्षा के बारे में इतना ही कहेंगे की ताले चोर के लिए नहीं होते, अपनी संतुष्टि के लिए होते है.
विडम्बना है
ये हैरी की ताकत् का मजाक् है।
जादू की छड़ी कहाँ गई उनकी. अब यह तो महज एक घटना है, क्या किया जाये.
पहले भी ऐसी अफ़वाह उड़ चुकी है कि किताब लीक हो गई(2006 अक्तूबर के आसपास) और बाद में कन्फ़र्म हुआ था कि वो लीक वाली कॉपी दरअसल नकली है जो किसी फैन ने एक साइट के लिए लिखी थी!!
हम तो अक्तूबर की लीक हुई कापी पढ़ चुके है पर फिर भी किताब लेकर ज़रूर पढ़ेंगें। मेरे ख्यााल में जिन्होंने उसकी अन्य किताबें पढ़ी है वे ओरिजनल किताब अवश्य पढ़ेंगे।
आज के युग मे पाइरेसी से तो तभी बचा जा सकता है जब इन किताबों को computer की दुनिया से ना जोडा जाये, पर भला अब ऐसा हो कैसे सकता है। खैर ये कोई अनोखी बात नही है आगे इससे बडे बडे किस्से भी सुनने को मिलते रहेंगे।
किताब पढ़नी है तो आज के टाइम्स में दिये लिंक्स पर जाईये……
संजय भाई, संजीव जी, अनूप जी, समीर जी - टिप्पणी के लिये धन्यवाद
अमित - जानकारी ले लिये धन्यवाद, ये मुझे पहले पता नही थी कि नकली पुस्तक पिछले साल भी आ गई थी (अन्यथा उसे भी पढते)। खैर कल नेट पर नकली और ‘असली’ दोनो मिल गईं। लगता है, इस बार वाकई लीक हुई है, क्योंकि पूरी पुस्तक के पन्ने चित्रों (Photographs) के रूप में डाले हुए हैं (करीब ३५० चित्र)| लिंक अपने चिट्ठे पर नही डालना चाहूँगा।
रत्ना जी - बढिया है..दो किताबें…डबल मजे
हृदयेश - हाँ जी, जो हो जाये वो कम है।
भुवनेश - टाइम्स देखा नही, हाँ, लिंक है अपने पास
jo bhi hay gelet hay.