हिन्दी का हैरी…
July 14, 2007 by Nitin Bagla
इस मौसम में, जब हैरी पाटर श्रृंखला की पाँचवी फिल्म सिनेमाघरों में पहुँच गई है और (संभवतः)आखिरी पुस्तक २१ जुलाई को निकलने वाली है, आप चाहकर भी हैरीमय होने से नही बच सकते। और अगर मेरी तरह उसे पसंद भी करते हों तो बात ही क्या है। चाहे इसे मार्केटिंग और मीडिया मेनेजमेन्ट कहिये या भेडचाल, इस बात को नही नकारा जा सकता कि हैरी पोटर श्रृंखला ने किताबों की दुनिया में नये आयाम स्थापित किये हैं। इस श्रृंखला के भावनात्मक पक्षों पर पर एक बेहद सुरुचिपूर्ण आलेख चंद्रभूषण ने लिखा है।
नई किताब और हो हल्ले के बीच, एक बात जो दब गई…या मीडिया ने जिसे ज्यादा ध्यान देने योग्य नही समझा वो ये कि श्रृंखला की पाँचवी पुस्तक का हिन्दी रूपांतरण पाँच जुलाई को बाजार में आया, भोपाल के मंजुल प्रकाशन के जरिये। मुझे इसकी जानकारी आज के ‘इकानामिक टाइम्स‘ (Thanks to media
) के जरिये लगी जिसने इस खबर को अपने मुखपृष्ठ पर जगह दी है। Harry Potter and Order of Phoenix का हिन्दी पुस्तक रूपांतरण है ‘हैरी पाटर और मायापंछी का समूह’ (हिंदी फिल्म का नाम ‘हैरी पाटर और फिनिक्स की फौज’)।
साहित्यिक बात से परे, जिस बात को लेख मे प्रमुखता दी गई है, वो है इस किताब का मूल्य…जो कि ३५० रुपये है। किसी हिन्दी पुस्तक के लिये ये दाम बहुत ज्यादा माना जा रहा था है (हिन्दी पढने वालों के बाजार को देखते हुए)..पर सच्चाई ये है कि पुस्तक के पहले संस्करण की सभी पाँच हजार प्रतियां पिछले १० दिनों में बिक गई हैं। साहबान, ये है हिन्दी का बाजार। आप फिर इसे मीडिया/मार्केटिंग/हाइप कह सकते हैं… हो सकता है कि ये सच भी हो, लेकिन ये भी सच है कि ३५० रुपये की किताब (हिन्दी किताब) लोगों ने हाथों हाथ खरीदी। (पहली ३ किताबें २००/- के नीचे थीं..चौथी २५०/-)। इसके अलावा मंजुल प्रकाशन का कहना है कि वे अब तक इस श्रृंखला की १,००,००० से ज्यादा पुस्तकें बेंच चुकें है (हिन्दी रूपांतर)…। हालांकि अंग्रेजी संस्करण की तुलना में ये संख्या कुछ भी नही, लेकिन जब हम सिर्फ हिन्दी किताबों के परिपेक्ष्य में देखें तो ये वाकई अच्छी संख्या है।(इसके आलावा मलयालम, गुजराती और मराठी संस्करण भी उपलब्ध हैं)। मांग को देखते हुए छठी पुस्तक (Harry Potter and the Half-Blood Prince) का हिन्दी रूपांतरण अगस्त में एवं सातवीं(Harry Potter and Deathly Hollows) का हिन्दी रूपाण्तर दिसम्बर में बाजार में उपलब्ध होगा।
क्या ये वाकई इस बात का द्योतक है कि हाँ, हिन्दी पुस्तकों को पढने वाले बडी तादाद में मौजूद हैं…एक बडा बाजार है हिन्दी का। क्या हिन्दी को एक बडे स्तर पर मार्केटिंग की जरूरत है? (भई जब हिन्दी फिल्में और टेलीविजन इतना हिट है तो किताबें क्यों नही? आखिर सप्ताहांत पर एक फिल्म सपरिवार देखने का खर्च कम से कम ५०० रुपये है बडे शहरों मे आज की तारीख में)। या ये सिर्फ विदेशों में हिट एक नायक की सफलता से उपजे क्षणिक हो-हल्ले और भावनात्मक उबाल का परिणाम है। पहली हैरी पोटर जब आई थी…तब इसे सिर्फ बच्चों की किताब माना जा रहा था, लेकिन आज इसके अन्य आयु वर्ग के चाहने वालों की भी कमी नही।
सके अलावा, क्या भारत में इस तरह की पुस्तकें लिखी जा रही हैं जो बच्चों/युवाओं/आम जनता के एक बडे वर्ग को अपनी और आकर्षित कर सकें। अंग्रेजी में चेतन भगत की Five Point Someone दो-तीन साल पहले युवाओं में काफी लोकप्रिय रही। युवाओं ने इसे हाथोंहाथ लिया। किताब की कहानी शायद कईयों को अपनी कहानी लगी और किताब अच्छी चली( देखादेखी बाद में ऐसी कई पुस्तकें आई पर उन्हे वो सफलता नही मिली)। क्या हिन्दी में भी ऐसी पुस्तकें आती हैं। यदि हाँ, तो वो कहाँ बिकती हैं? उनके बारे में जानकारी कहाँ से प्राप्त की जा सकती है? रेल्वे स्टेशनों पर मौजूद ए. एच. व्हीलर्स के अलावा और कहाँ पर आप अच्छी हिन्दी पुस्तकें प्राप्त कर सकते हैं? मैने सदा से सुना है कि बाबू देवकीनंदन खत्री के उपन्यास चन्द्रकांता को पढने और समझने के लिये उस जमाने में कई लोगों ने हिन्दी सीखी थी एवं ये उपन्यास अत्यंत लोकप्रिय हुआ था। मोटे तौर पर देखें तो जादू-टोने के मामले में हैरी पोटर बच्चों के चन्द्रकांता जैसा दिखता है, हालंकि इसका(हैरी का) भावनात्मक पक्ष अत्यंत सशक्त है (चन्द्रकांता मैने पढा नही, सिर्फ टी.वी. धारावाहिक देखा है)।
क्या हिन्दी को हिट करने के लिये कोई फिर चन्द्रकांता लिखी जायेगी? हैरी पोटर ना सही, हरी पुत्तर सही…

Bhai dont know why till date I have not been able to read any harry potter novel neither seen any of the four flicks. Good or bad i really dont know, you may say my basic dislike for “Jaadu tona stuff” prevented me frm doing so. Another reason was me not in the elite reader list of people like Rahul , santosh and you. I was more comfortable with Light stuff like Sidney sheldon, Jeffery archer types. Why Iam writing all this is because i dont really understand this madness for Harry Potter. And I agree with you that from the limited i hav Seen it looks like chandrakanta though in my younger days(
I read chandrakanta & 7 parts of Chandrakanta Santiti and I loved them.
Dont you feel that all this hype now is more media created than original, you are considered more happening if you can discuss harrry Potter. I feel translating books like these will cause only harm to the Indian language (my personal feeling)..
सत्य है कि चाहे जैसे भी हो इसकी सफलता को नकारा नहीं जा सकता. क्या बिजिनेस किया है पहले हफ्ते का ही..वाह!! पढ़ लिया था, देर से टिप्पणी करने के लिये क्षमा चाहता हूँ.
कोई बात नही आलोक, अब फिल्म और किताब दोनों का रसास्वादन कर लो :), बाकी तो पसंद अपनी अपनी
रही बात Hype की, वही तो मैं कहना चाहता था कि हिन्दी की किसी किताब का ऐसा Hype क्यों नही किया जाता (जा सकता)
समीर जी-ऐसे क्षमा लिख कर आप हमें शर्मिंदा कर रहे हैं।कृपया ऐसा ना कहें, हम छोटे हैं आपसे (कई चीजों में) । टिप्पणी के लिये धन्यवाद