कितनी ‘लाल मस्जिद’ ?
July 9, 2007 by Nitin Bagla
पाकिस्तान की इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद करीब पिछले २० दिन से सुर्खियों में है। वैसे तो सरकार और लाल मस्जिद के बीच तनातनी पिछले ५-६ महीनों से चल रही थी और यह भी सुना/पढा है कि लाल मस्जिद में लड रहे लोगों पर पहले मुशर्रफ का ही हाथ हुआ करता था, लेकिन लगता है खुद की लगाई आग खुद मुशर्रफ को जलाने लगी होगी । (घटना क्रम बहुत हद तक सन ८४ में इंदिरा गाँधी और भिंडरावाला की याद दिलाता है।)
मैं ये सोंच रहा था कि सिर्फ एक लाल मस्जिद पर काबू पाने में पाकिस्तान की सेना को नाकों चने चबाने पड रहे हैं…पिछले २० दिन से उनका घेराव किया हुआ है लेकिन उन पर काबू नही पा सके हैं अब तक । दूसरी तरफ लाल मस्जिद के आतंकवादियों के जो फुटेज आ रहे हैं…उनके पास मौजूद हथियार देख कर आश्चर्य होता है…राइफल, रिवाल्वर, शायद राकेट लांचर भी..क्या क्या नही जमा किया हुआ है भीतर। ये स्थिति देश की राजधानी में स्थित एक संस्थान की हैं…ऐसे कितनी मस्जिदें/मदरसे समूचे पाकिस्तान में बिखरे पडे होंगे, कितने हथियार उन्होने जमा किये हुए होंगे, इसकी तो सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है, भयावह कल्पना।
मुशर्रफ पर तो तरस आता ही है..पर अपने यहाँ रहीम दास जी बहुत पहले कह गये हैं “बोया पेड बबूल का, तो आम कहाँ से खाय “
जो बोया है…उसकी फसल तो उन्हे काटनी ही होगी ।

Its all a event which I think Musharaf has orchestrated for intl media to polish his falling image. Just wt and watch how this gets resolved.aur bata hows life..
बार बार बोला गया सुफ़ैद झूठ भी अब एक्सपोज़ हो रहा है कि हम आतंकवादियों को पनाह नहीं देते.भस्मासुर भगवान की जय !
सच है… कितने पाकिस्तान!!!
सत्य कहा आपने- भयावह कल्पना।
भाई अभी अभी हमें याद आया कि आपको हिन्दी चिठ्ठाजगत में दो साल पूरे हो गये हैं
बधाई स्वीकार करें।
आलोक- ये भी एक संभावना हो सकती है…वैसे कहा ये भी जा रहा है कि जस्टिस चौधरी वाले मु्द्दे से ध्यान हटाने का मकसद भी हो सकता है
संजय पटेल - जय हो जी
दिव्याभ- “कितने पाकिस्तान”…पढी नही है ये किताब To Read सूची में शामिल है।
समीर जी - वाकई भयावह
सागर भाई- शुक्रिया…दूसरी बरसी की बधाई का…