सात अजूबे - अपनी नजर से
July 7, 2007 by Nitin Bagla
“हाँ…तो बोलो बच्चों अजूबा क्या है?”- मास्टर जी ने छडी घुमाते हुए गुटखे की जुगाली की और कक्षा में बैठे छात्रों से पूँछा ।
एक अतिउत्साही बालक बोला- गुरुजी, अजूबा अमिताभ बच्चन की एक पिच्चर है, जिसमें ऋषि कपूर भी है…और डिम्पल कपाडिया और सोनम भी। लडाई-मारधाड और कामेडी से भरपूर ये फिल्म कल रात को आठ बजे स्टार गोल्ड पर आने वाली है।
“हट बुडबक” कह कर मास्टर जी ने एक दूसरे छात्र की तरफ निगाह दौडाई जिसके चेहरा पहले छात्र का जवाब गलत सिद्ध किये जाने से निखर उठा था ।
“मास्टर जी, अजूबा एक जगत प्रसिद्ध तेल है जो हर रविवार को सपना टाकिज के पीछे वाली गली में बैठने वाले खानदानी हकीम हवाबाज-कारस्तान लोगों को बांटते हैं और जो लाख मर्जों की एक दवा है।”
तेल का नाम सुनते ही मास्टर जी के चेहरे पर कुछ अजीब से भाव आये जिन्हे उन्होने बडी मेहनत से जब्त किया और अपने छात्रों की नादानी पर सर ठोकते हुए गुटखा थूकने कक्षा से बाहर चल दिये।
ये तो थी भूमिका, पर मैं सोंच रहा था, कि यक्ष ने अगर युधिष्ठिर से यही सवाल किया होता….या बेताल ने विक्रम को सर के टुकडे टुकडे वाली धमकी देकर ये पूँछा होता तो उनके क्या जवाब होते।
ये रहे फटाफट सोंचे गये सात नमूने अजूबे….
१) एक मूर्खता भरे सवाल के लिये…या एक नमूने को दूसरे नमूने से बेहतर साबित करने के लिये लोग ६ रुपये का एस. एम. एस. करने से भी नही हिचकते।
२) एक तरफ टी. वी./मोबाइल/इन्टरनेट के प्रयोक्ता बढ रहे हैं..तकनीक विकसित हो रही है….पर शायद उसी अनुपात में बढ रहे हैं टी. वी. चैनल्स पर आने वाले भूत/चुडैल/बाबानुमा कार्यक्रम ।
३) मुंबई को शंघाई बनाने का दावा करने वाले मुंबई की सडकों से बरसात का पानी तक नही निकलवा पाते ।
४) मनमोहन सिंह २०-२२ घंटे काम करने वाले CEOs को कम वेतन लेने की सलाह देते हैं…पर अपने सहकर्मियों (नेताओं) को मिलने वाले वेतन, भत्ते और खर्चे पर उनका कोई ध्यान नही जाता जिसका कि कोई हिसाब भी नही है, जिस पर कोई टेक्स भी नही लगता । क्या ये भी उन्हें मेडम बतायेंगी?
५) हिमेश रेशमिया की हर कोई बुराई करता है, पर उसके अधिकतर गाने हिट होते हैं और तो और उसकी पहली फिल्म सुपरहिट हो जाती हैं और उसकी सीक्वेल बनाने की योजना बन जाती है
६) सैंकडों गांधीवादी बरसों से जिन बापू को लोगों के दिमाग में घुसाने की कोशिश करते रहे, उन्हे अपने ऊपर बम कांड का मुकदमा झेल रहा एक शख्स एक फिल्म के माध्यम से अच्छी पब्लिसिटी दिला देता है मार्केटिंग और पैकेजिंग के दम पर । गाँधीवाद को गाँधीगिरी में बदल कर। पता नही स्वर्ग में बैठे गांधी मुस्कुराये होंगे या रोये होंगे…।
७) बुश उवाच - “आतंकवाद के खिलाफ लडाई में पाकिस्तान का योगदान सराहनीय है “
वैसे नमू्नों अजूबों पर किसी का जोर थोडे ही है….एक ढूंढो हजार मिलते हैं…आप भी दिमाग लगाइये और बताइये कुछ।


बहुत ही बढिया. क्या खबर ली है . वाह !
सही सात अजूबे लाये है.
सही है गुरु
आपने इतनी सारी चीजें जब सोच ही लीं और सही-सही सोचा तो हमारे सोचने की जरूरत भी क्या है? लेकिन यार इतना कहते-कहते ही मुझे दो-तीन अजूबे सूझने लगे. थोडा और सोच लूं फिर बताऊंगा.
सबसे बड़ा अजूबा तो यह है कि पक्के आलसी बागला जी जल्दी जल्दी लिखने लगे हैं।
sahi hai… aap ka surror had a terrific feedback in reviews,still the movie is hit - its a wonder!
Liked the madam word especially the single “AE” ki matra.. wrt to Manmohan Singh!
Frankly speeking I thought this was about inclusion of Tajmahal as 7 wonders, anyways urs are all great.
वाह, बिल्कुल सही ७ अजुबे.
विचारोत्तेजक, उन के लिये जो लेख के पीछे छिपे मर्म को समझ सकें !!
पंकज भाई, संजय भाई, संजीत, समीरे जी, शास्त्री जी - टिप्पणी के लिये धन्यवाद ।
इष्टदेव - आपके अजूबे भी पढे…मेरे अजूबों से ज्यादा अजीब हैं (वैसे अजूबों पे किसी का कापीराइट नही होता ना)
सागर भाई - ऐसे तारीफ करोगे तो लम्बी तान के सो जाऊंगा
अखंड - ’आपका सुर्रूर’ का हिट होना कईयों को आश्चर्य में डाल गया…पर बन्दे ने मेहनत तो की थी,
….तारीफ का शुक्रिया