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Archive for July 5th, 2007

हर हफ्ते-दस दिन में देश को एक मुद्दा मिल जाता है। मुद्दा कुछ भी हो सकता है, कोई विवाद हो तो सोने पे सुहागा।…कहीं से भी उठ सकता है…सामान्यतः पहले मीडिया इसे लपकता /उठाता है…दृश्य-श्रव्य मीडिया पहले क्योंकि उसे २४ घंटे कुछ न कुछ दिखाना होता है..फिर अखबार-पत्र-पत्रिकाएं ले लेते हैं…बचा-कुछा कुछ चिट्ठेकार भी लपक [...]

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