चिंता
June 10, 2007 by Nitin Bagla
चिंता १ :
नही मिल रही शाम की फिल्म की टिकट
मोबाइल की बैट्री डाउन, स्थिति विकट
नही बची हार्ड डिस्क में जगह
फ्लाइट में आधा घंटा देरी, बिला वजह
बास के गुस्से का, क्या है भेद ?
उसकी कमीज मेरी कमीज से कैसे है सफेद ?
चिंता २:
राष्ट्रपति कौन बनेगा?
अमिताभ ठीक नही कर रहे, ऐसा तो नही चलेगा
यू.पी. की सरकार ,
सांसदों का व्यवहार,
परमाणु करार ।
क्रिकेट का नया कोच,
हीरोइन के पांव की मोच,
और अब
छोटे आदमी की छोटी सोंच ।
चिंता ३ :
कैसी होगी फसल, कब बरसेंगे मेघा ?
स्कूल खुलने वाले हैं, फीस कहां से देगा ?
महीने के ये ५ दिन कैसे बीतेंगे ?
सूखे हुए घडे, और कितना रीतेंगे ?


ये चिंतायें तो फुर्सत में सभी करते हैं जी. आपकी स्पेशल चिंता कोई है?
वैसे आपने ” हीरोइन के पांव” लिखा तो अचानक डर लगा कि अगला शब्द “भारी” तो नहीं है!
और आपको महीने के 5 दिन की पड़ी है. हमें तो हर सण्डे को “मण्डे फीवर” होने लगता है!
अभी विवाह नहीं हुआ तब तक इन चिन्ताओं में ना पड़ें। बाद में जिन्दगी भर यही रोना है।
ज्ञानदत्त जी, इनमें से कई चिन्ताएं हमारी भी हैं, रही बात स्पेशल चिंता की, कई हैं, कभी पुराने पोस्ट देखियेगा..

अब एक प्रश्न, हीरोइन के पांव ‘भारी’ भी होते, तो आपको क्यों ‘डर’ लगने लगा, बस ये बता दीजिये जरा
फिलहाल मुझे भी मण्डे फीवर चढा है…
सागर भाई, आपबीती सांझी करने का शुक्रिया, वैसे हो तो भी चिंता, ना हो तो भी चिंता..
बड़े दिन बाद और वो भी इन चिंताओं के साथ ?
गंभीर चिंतायें हैं…अच्छी तरह प्रस्तुत भी किया है आपनें
*** राजीव रंजन प्रसाद
हर वर्ग की चिंताओं का सही चित्र्ण है.. आप्बीती भी और जग्बीती भी..
सही है! लेकिन हीरोइन के बारे में ज्यादा चिंता ठीक नहीं है!
bahut achhe!
मनीष भाई…सही कह रहे हैं..दिन कुछ ज्यादा हो गये इस बार..
राजीव ,मान्या, पंकज भाई - शुक्रिया और धन्यवाद
अनूप जी..आप कह रहे हैं तो ठीक है, नही करत हीरोइन की चिन्ता
[...] है..। रविवार शाम होते होते हैप्पीनेस मन्डे फीवर में बदल जाती है। छुट्टियों में घर [...]
Nitinji asli chinta jatai aapne.Ye choti chhoti baatein dikhne mein hi chhoti hai, rozmarra ki zindagi inhi sawaalon ke kathghre mein beet jaaati ahi. House wife ke drishtikon se dekha jaye to aaj sabzi kya banegi, ye bhi kam chinta ki baat nahi, beta tuition ki jagah kahin aur to nahi jata, ye bhi chinta hai, beti ke achhe chaal-chalan ki bhi chinta. Aji ye sab rehne dijiye, aaj kaam wali bai aayegi ki nahi, sabse badi chinta yahi hoti hai. Nitinji blog ko devnagri mein kaise post karoon, yadi margdarshan karenge to aabhaari rahoongi.