“भाई तुम तो कभी बाथरूम में भी मत गाना”
यह कहना था, अनु मलिक का, इंडियन आइडल (Indian Idol) का आडिशन देने आये एक प्रतिभागी से। माना कि गाने वाला वाकई बेसुरा था (९०% आडिशन देने वाले ऐसे ही थे), लेकिन शायद अनु मलिक ये भूल गये कि ऐसे ही बेसुरे बाथरूम सिंगर्स की बदौलत बालीवुड संगीत उद्योग इतनी कमाई करता है । उन्ही बेसुरों द्वारा भेजे गये एस.एम. एस. की बदौलत इंडियन आइडल नोट छापता है…बाथरूम में गाने का हक तो ना छीनों यार । और जब अनु मलिक ’ओरिजिनालिटी’ की बात करते हैं, तो ऐसा लगता है कि शक्ति कपूर बच्चों को नैतिक शिक्षा की क्लास ले रहे हों।
छोटे परदे पर आने वाले महीनों में फिर इस तरह के कार्यक्रमों की धूम रहने वाली है। पिछले हफ्ते सोनी ने इंडियन आइडल का तीसरा संस्करण शुरू किया, तो जीटीवी ने सा रे गा मा चेलेन्ज की शुरुआत की, जिसे ’संगीत के प्रथम विश्व युद्” के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। इं.आ. के साथ इस बार अनु मलिक, आलिशा चिनाय, उदित नारायण और जावेद अख्तर जुडे हैं, तो सा रे गा मा चेलेन्ज के साथ हिमेश रेशमिया, बप्पी दा, विशाल-शेखर, इस्माइल दरबार, आशा भौंसले और गुलाम अली जुडे हुए हैं। स्टार भी १८ मई से ऐसा ही एक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। हालांकि, इ.आ. के पहले दो संस्करणों के विजेता और सारेगामा चेलेन्ज के पिछले संस्करण के विजेता आज किन बुलन्दियों पर हैं, मालूम नही। ना ही अभिजीत सावंत के शुरुआती अलबम ’मुहब्बतें लुटाऊंगा’ के बाद किसी अन्य प्रतियोगिता का कोई विजेता कोई हिट अल्बम दे पाया। दिलचस्प बात ये है कि जहाँ उदित नारायण इ.आ. में जज बने हुए हैं, वहीं उनके बेटे आदित्य ने सा रे गा मा के संचालन का जिम्मा संभाल रखा है। आवाज आदित्य की भी बहुत अच्छी है। बाप बेटे दोनो मिल कर कूट रहे हैं
इन चेलेन्जेस से थोडा जुदा, इंडियन लाफ्टर चैलेन्ज (Indian Laughter Challenge) भी अपना तीसरा संस्करण स्टार वन पर १८ मई से शुरु करने जा रहा है। जहाँ पहले साल में इस कार्यक्रम ने भरपूर दाद बटोरी थी, दूसरे साल में वो बात नही रही, और अब तो इतना दुहराव होने लगा है कि पूंछिये मत (चलिये पूंछ लीजिये
)| हर न्यूज चैनल अब लाफ्टर चेलेन्ज बन गया है, और स्टार न्यूज तो इतनी बार रिपीट टेलिकास्ट कर चुका कि …..पूंछिये मत। राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल, अहसान कुरैशी आसि की तो निकल ही पडी है। राजू किसी कार्यक्रम में खूब सूरत राखी सावंत के साथ आते हैं, जिसमें राखी (क्या मस्त नाम रखा है) की जिम्मेदारी है, अपनी हँसी से लोगों को डराना..
सा रे गा मा चेलेन्ज के एक एपिसोड में हिमेश रेशमिया प्रतिभागी से किसी बात पर बोले, मेरी आवाज थोडी Contraversial एवं Unconventional है। इस पर बप्पी दा बीच में ही बोल पडे…नही हिमेश , तुम्हारी आवाज एकदम आरिजिनल है। …लीजिये अब तो बप्पी दा का प्रमाण पत्र भी मिल गया। सुना है कि शूटिंग के बाद हिमेश ने मंदिर जाकर प्रसाद चढाया, इसलिये कि बप्पी दा ये नही बोले कि हिमेश, तुम्हारी आवाज बिल्कुल मेरे संगीत की तरह आरिजिनल है।
तो सपनों के सौदागर, कमाई के मंसूबे बना कर तैयार बैठे हैं, अगले २-३ महिनों में फिर कुछ नाम उभरेंगे, अखबार एवं न्यूज चैनलों को अच्छा मसाला मिल जायेगा । सोनी को तो विश्वकप में हुए नुकसान की भरपाई भी करनी है। इन सबके बीच, कभी कभी जी टीवी पर पुराने सारेगामा, जब सोनू निगम संचालित करते थे, की कडियाँ पुनःप्रसारित होती हैं, तो मई के महीने में हैदराबाद में पड रही बौछारों की तरह महसूस होता है। संगीत की जो गुणवत्ता उस कार्यक्रम में थी, वो फिर कभी नही रही। जमाना अब पैकेजिंग का है, सो आइडल बनने के लिये आपको गाना ही नही, लटके झटके भी तो चाहियें।
*मात्रा और गुणवत्ता में व्यत्क्रमानुपाती संबंध होता है.* एक जैसे कार्यक्रम आएँगे तो ज़ाहिर है कि हर कोई गुणवत्ता कायम रखने का माद्दा नहीं रखेगा. बाज़ार बड़ा हो गया है. शातिर हो गया है. कई लोगों को अपना भाग्य रातों रात चमकाना है. ऐसे में गोरखधंधे तो होंगे ही.
आपने तो पूरा विश्लेषण ही कर दिया.. खासी रिसर्च कर ली. इसके लिए बधाई
बढ़िया शोध किया गया है और अब हम पूरी तैयारी के साथ इन कार्यक्रमों को सुनने का इंतजार कर रहे हैं.
इस तरह के गायक शोध कार्यक्रमों से किसी का फायदा ना हुआ है, ना ही होगा. सिर्फ चैनल जरूर कमा जाएंगे. क्योंकि दर्शक मिलते हैं
इसे एक धारावाहिक की तरह लो, और मजे से देखो. खुश रहो कैसा आइडल, कैसा मुकाबला.
कई बार बहुत ही बेसुरे प्रतियोगी आते हैं पर जजों का रवैया बहुत खराब होता है। बेचारे नये लोगों को कई बार बहुत अपमानित किया जाता है। एकाद बार अन्नू मलिक को इस तरह की हरकतें करते देखने के बाद देखना बंद कर दिया।
एक बार एक मोटी सी लड़की पर जगजीत सिंह ने कमेंट किया था उनके वजन के बारे में जिसका लहजा इस तरह का था मानो उस बच्ची की मजाक उड़ा रहे हों।
इन सब से सारेगामापा फिर भी कुछ हद तक ठीक लगता है।
tera article mast he yaar…baaki badkismati se hame kuchh dekhne ka mauka nhi milne vaala ye pakka he so hum to sun sun ke hi khush ho sakte he ….
हमेशा की तरह बढिया लिखा नितिन जी । अमेरिकन आइड्ल में संजय मलक्क्ड को खराब गाने के बावजूद इसलिये चुना गया क्युंकि उनकी वजह से शो में ड्रामा बहुत बढेगा । पर संजय वोट पे वोट बटोरते रहे और बड़ी मुश्किल से बाहर निकले । प्रतिभा को बढावा देना शायद आखरी उद्देश्य है आइड्ल शोस का । शायद यही वजह है की prescreening के बावजूद ये प्रतियोगि कैमरे पर आ जाते हैं ।
satya vachan gurudev,in ab talent shows ko band kar dena chahiye…The channel calls people , ask them to sing and then the judges make fun of him, its not music but cheap drama..
Great work Nitin. Keep it up.
नीरज जी, सत्यवचनम
समीर जी, देख कर बताइयेगा जरूर
छोटे भैया-कमाई का ही तो फेर है सारा
बडे भैया – खुश तो रहते ही हैं
सागर जी – सारेगामापा का गायक स्तर फिर भी अच्छा है..पर लटके झटके वहां भी कम नही…
भास्कर – क्या हुआ..टी.वी. नही है या शहर से बाहर है?
नितिन – “प्रतिभा को बढावा देना शायद आखरी उद्देश्य है” बिल्कुल सही..पहला तो कमाई है..
आलोक – बन्द कर देंगे तो खायेंगे क्या..कैसी बात करते हो भाई
विनीत – शुक्रिया
आपने सही कहा कि इन कार्यक्रमो में संगीत की अपेक्षा पैकेजिंग को ज्यादा महत्व मिलता है, सुर से ज्यादा लटके झटके चलते हैं, लेकिन इनसे कई नये चेहरो को मौका भी मिल रहा है.ये अलग बात है कई बार प्रतिभागियो का स्तर उतना अच्छा नहीं रहता.
मुझे भी सा रे गा मा प का स्तर कुछ ठीक लगता है, लेकिन रेशमिया जैसे बेसुरे को जज बना कर बिठाया गया है. प्रतिभागी भी उनसे बेहतर गा लेते हैं.
baagla bhaiya…aajkal office me kaam badh gaya he kya jo blog pe kuchh naya nhi prakashit kar rahe ho…
puraane angrzi gaane sunon… anu malik ke sari dhunen mil jaayengi….
hey loved ur two statements:
1. baap bete mil kar koot rahe hain
2. rakhi kya mast naam hai
Good yet again.
नितिन बंगला जी
आपके बहुत सारे चिट्ठे पढे, ये तो नही कहूंगा कि आपका Fan बन गया Fan तो मैं किसी का नही हूँ पर इतना जरूर कहूंगा कि आपने बहुत अच्छा लिखा है। ये मेरी पहली टिप्पणी है और चिट्ठे लिखने का तो मेरे पास समय नही है।
आपके चिट्ठे पढकर ऐसा लगता है कि आप भी ओरकुट भक्त हैं (बडे नही तो छोटे ही सही ) वैसे मैं भी ओरकुट भक्त हूँ, आपका ओरकुट profile देखने की इच्छा हो रही थी। आगे क्या करना है ये तो आप समझ ही गये होंगे।
विशाल, टिप्प्णी के लिये धन्यवाद। हिमेश को इसलिये बिठाया है, क्योंकि वो बिकते हैं और क्या..मार्केट है उनका।
भास्कर-अभी ऐसी कोई शिकायत नही होगी
अखंड- शुक्रिया
हृदयेश- टिप्पणी के लिये धन्यावद। आपको लेख पसंद आये, ये मेरे लिये प्रसन्नता की बात है, आगे और लिखने का संबल मिलेगा।
ओर्कुट भक्त तो नही हूं…पर परहेज भी नही करता इससे