अजनबी..तुम जाने पहचाने से लगते हो
April 19, 2007 by Nitin Bagla
कैसा महसूस होता है जब कोई धीरे धीरे इतना करीब आ जाता है कि पता भी नही चलता और वो जिन्दगी का हिस्सा बन जाता है।
अजनबी, कल जब तुम मेरी जिन्दगी में आये थे, तो तुम्हारे लिये मैं और मेरे लिये तुम कितने नये नये थे।…अनेक आशंकाओं, पर उत्साह से मन भरा हुआ था। उत्साह आज भी है, पर आशंकाएं विश्वास में बदल चुकी हैं। और साथ में हैं, तुम्हारे संग बिताये पल, चाहे वो सिनेमाघरों की अंधेरी सीटे हों या बिडला मंदिर के प्रांगण से दिखता विहंगम दृश्य। ट्रेफिक में फँसा हुआ आटो अथवा रविवार को अबिड्स में पटरी लगने वाली की दुकानों पर किताबों को देखते हुए चहलकदमी। हर समय, हर जगह तुम मेरे साथ थे और तुमसे अपनेपन का रिश्ता जुडता गया ।
अब इससे पहले कि आप मुझे तरह तरह की बधाइयां देने लगें और मेरी पिछली पोस्ट की तरह कुछ गलतफहमियां पैदा हो जायें, मैं स्पष्ट कर दूं कि ये पंक्तियाँ समर्पित हैं, इस प्यारे से शहर हैदराबाद को जहाँ रहते हुए मुझे हाल ही में एक साल बीत गया| ऐसा भी नही है कि एक साल में मैने इस शहर की खूब खाक छानी है या खूब घूमा हूँ, कुछ परिचित रास्तों को छोड दें, तो ज्यादतर हिस्से से वाकिफ भी नही हूँ, पर फिर भी…बात है भाई।
बावजूद इसके कि मैं अब भी तेलुगु के २-४ वाक्य भी ठीक से नही बोल पाता, आज तक एक भी तेलुगु फिल्म नही देखी, तेलुगु का कोई गाना ठीक से नही गा पाता और सानिया मिर्जा के अलावा किसी हैदराबादी लडकी को नही जानता। बावजूद इसके कि अभी तक चारमीनार नही देख पाया हूँ ना ही गोलकुंडा का किला और मारडपल्ली, कूकटपल्ली और चीकटपल्ली(ये सब जगहों के नाम हैं) भी मेरे पल्ले नही पडते । बावजूद इसके कि इन १२ महीनों में से नौ महीने अनगिनत होटलों की चौखटों पर सर पटक पटक कर नाक भौं सिकोडते हुए रसम चावल इडली डोसे खाये हैं, पिछले एक साल में ये शहर इतना करीब आ गया कि अब अपना दूसरा घर जैसा लगने लगा है।
अजनबी..तुम वाकई जाने पहचाने से लगने लगे हो यार !


नितिन भाई,
बड़े होटलों से निकलेंगे तो आपको हैदराबादी बैगन भी मिलेगा और छोटी चाय की दुकानों में मस्का-पाव भी।गो्लकुंडा के लिए तो जरूर समय निकालिए।ध्वनि-विज्ञान के चमत्कार और स्थापत्य से उनका मेल देख कर अचरज में पड़ जाता है,देखने-सुनने वाला।
सानिया के अलावा तब्बू का शहर भी अब आपका शहर है।
badhai ho malik, अपने शहर से सबको लगाव होता है.
आपको भी है. कभी आएँ तो घुमाइएगा इस बहाने 
“सानिया मिर्जा के अलावा किसी हैदराबादी लडकी को नही जानता। ”
आपका ये statement तो आपको चिट्ठाकारों में सेलीब्रेटी बना देगा । :p
हा हा हा !
सानिया के अलावा दिया मिर्जा को भी जानते होंगे, वो भी शायद हैदराबाद से ही हैं।
bhai acha laga aapka vichaar, waise jahan bhi raho us jegah se moh to ho hi jaata hai… chahe woh kaisee bhi ho..
अफलातून जी, बैंगन और मस्का पाव भी आजमाया जायेगा। गोलकुंडा तो देखना है ही…कब से ’to do’ list में है…सानिया, तबू गिना दीं..अच्छा हुआ सागर नाहर नही गिनाये
पंकज भाई..अग्रिम स्वागत
मनीष -
ई पन्डित- बात ऐसी है कि जानता तो मैं कइयों को हूं
अखंड - सही कहा…