अभी अभी मोहल्ला पर मदन कश्यप का आलेख पढा, जिस पर उन्होने राहुल गांधी द्वारा बाबरी मस्जिद पर दिये गये बयान के बारे में अपने विचार प्रकट किये हैं। संयोग से आज ही मैने क्रिस्टोफर क्रेमर (Christopher Kremer) की पुस्तक ‘इनहेलिंग द महात्मा’ (Inhaling the Mahatma) खत्म की है, जो कि लेखक के भारत में बिताये गये कुछ सालों का संस्मरण है।
राहुल गांधी ने बिल्कुल यही सोंच, इस पुस्तक के लेखक के साथ हुए वार्तालाप में भी प्रकट की है । राहुल कहते है”…My father would not have allowed that. No question of it. If any one of my family was in politics-I mean, just in polictics, not even in power-at that time, it would not have happened.” (पृष्ठ ३३३) यह वक्तव्य सितम्बर २००४ में दिया हुआ है, याने ऐसा नही है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश के चुनावों के मद्देनजर ये बयान आया है।
वैसे नेहरू-गांधी परिवार द्वारा इस तरह के वक्तव्यों से किसी को आश्चर्य नही होना चाहिये। दरअसल राहुल तो अपने परिवार की परम्परा का पालन कर रहे है। दादी इन्दिरा ने कभी पार्टी को कुछ नही समझा और बडे से बडे नेताओं को अपने इशारों पर नचाया । जिसे चाहा उसे मुख्यमंत्री बनाया और जिसे चाहा उसका टिकट कटवाया। पिता राजीव का अपना अलग ही ‘फ्रेन्ड सर्किल’ था, याने विश्वस्नीय सहयोगी, जिन पर वो भरोसा करते थे और सलाह मशवरा लेते थे । अब अगर राहुल भी वही कर रहे हैं तो वो तो परिवार की परम्परा को ही आगे बढा रहे हैं, कांग्रेस को तो इसकी आदत हो चुकी है पिछले ६० साल में।
और हाँ, अभी दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने एक समारोह में मौनी बाबा नरसिम्हा राव की जम कर तारीफ की। शर्तिया कह सकते हैं, १० जनपथ पहुंच कर बहुत डाट खाई होगी मन्नू जी ने।
अपनी राय जाहिर करने का हक सबको है। उन्होंने भी कर दी!
अपनी मूर्खता प्रकट करनी का भी हक सबको है। उन्होंने भी कर दी ।
पोस्ट से ज़्यादा तो टिप्पणी में मज़ा आ गया, सच में बहुत मज़ा आया
अब मुझे कुछ जाहिर या प्रकट करने की ज़रूरत ही नहीं
राहुल भी प्रकारांतर से वैसी ही मूर्खता कर रहे हैं जैसे बाकी कांग्रेसी करते आ रहे हैं और इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानते हैं. लगे रहे राहुल जी. वैसे भी राजनीति मे सब जायज है.
Yaar see when u are fed information like a parrot only that will come out, its very clear how much understanding he has of politiics or of uttar pradesh, but i agree that ignorance is no execuse.But before being judgemental about him or say any other new entrents to politics we should give them some elbow space..we have to examine the underlined causes for any event so as to pass on a valid comment…
अनूप जी, आप मनमोहन जी की राय की बात कर रहे हैं, या राहुल की?


समीर जी
अतुल जी
अखिलेश, मेरे खयाल में सिर्फ कांग्रेस ही नही, मूर्खता पर सबका जनमसिद्ध अधिकार है, जैसा ऊपर समीर जी ने कहा
अलोक, अभी हम judgemental तो हुए ही नही, हमने सिर्फ उनके विचारों पर अपनी राय प्रकट की है ।
“..we have to examine the underlined causes for any event so as to pass on a valid comment…”, भाई, ये बात तुम इस पोस्ट के संदर्भ में मुझे कह रहे हो या बाबरी वक्तव्य के लिये राहुल गांधी को कह रहे हो ? शायद मुझ पर तो ये लागू नही हो रही..
“elbow space”..अरे भाई…सिर्फ एल्बो नही…पूरी चद्दर तान लें, इतना स्पेस है राजनीति में…
No saar u took the comments in the wrong way, i was more generalistic(mea culpa), the comments were not meant for any particular incident or person.regret the inconvenience
वही तो मुझे भी लगा था, इसी लिये मैने कहा कि शायद मुझ पर लागू नही होती…