Posted in बकर on April 29, 2007 | 31 Comments »
विषय: हिन्दी चिट्ठाकारिता का प्रारंभिक इतिहास (भाग – १)
कक्षा – एम. बी. (मास्टर आफ ब्लागिंग)- प्रथम वर्ष
मई-२१०७
परीक्षार्थियों के लिये कुछ अन-आवश्यक दिशा-निर्देश :
कृपया अपने उत्तरों की लम्बाई एवम शब्द सीमा का ध्यान रखें। दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न फुरसतिया की सबसे छोटी पोस्ट से लम्बे ना हों और लघु उत्तरात्मक प्रश्न आलोक की सबसे लम्बी पोस्ट से [...]
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Posted in मुद्दा, विचार, समाज on April 23, 2007 | 13 Comments »
अभी हाल ही में मैने फिल्म ब्लड डायमंड (Blood Diamond) देखी थी । पिछले साल की यह बहुचर्चित फिल्म अफ्रीकी देशों में गैरकानूनी रूप से हो रहे हीरों के खनन एवं व्यापार, इस काम में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लघन, हीरे की चमक से चौंधियाई ’पहली दुनिया’, इन देशों में गृहयुद्ध जैसे हालात और इस [...]
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Posted in आपबीती, यादें, हैदराबाद on April 19, 2007 | 6 Comments »
कैसा महसूस होता है जब कोई धीरे धीरे इतना करीब आ जाता है कि पता भी नही चलता और वो जिन्दगी का हिस्सा बन जाता है।
अजनबी, कल जब तुम मेरी जिन्दगी में आये थे, तो तुम्हारे लिये मैं और मेरे लिये तुम कितने नये नये थे।…अनेक आशंकाओं, पर उत्साह से मन भरा हुआ था। उत्साह [...]
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Posted in पुस्तक, पुस्तक चर्चा on April 14, 2007 | 7 Comments »
पिछले दिनों में मैने दो किताबें पढी हैं, तीसरी पढ रहा हूं और चौथी शुरू करने वाला हूँ (ये सोंच कर खुश मत होइये कि मुझे नौकरी से निकाल दिया गया है और मेरे पास करने को और कुछ नही है, नौकरी बढिया चल रही है… )। चारों किताबें भारत के इतिहास पर [...]
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Posted in बकर on April 10, 2007 | 23 Comments »
शादी करने की सही उमर क्या होनी चाहिये ? सवाल दिखने में बडा आसान है, पर है बडा पैचीदा ।
वैसे तो बडे लोग कह गये हैं कि ये मोतीचूर नामक लड्डू की तरह है…जो खाकर पछताये जो ना खाये वो भी पछताये, लेकिन जब पछताना ही है, तो खाकर ही क्यों ना पछताया जाये, कम [...]
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Posted in क्रिकेट, बकर on April 9, 2007 | 9 Comments »
भारतीय क्रिकेट को संभालने के लिये, खिलाडियों को नौकरी देने वाली सोसाइटी (क्लब), BCCI की हाल ही में हुई बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप के पहले ही दौर में बाहर निकल जाने की मुख्य वजह ये थी कि खिलाडी एक समय में तीन से ज्यादा [...]
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Posted in देश, मुद्दा, राजनीति on April 1, 2007 | 8 Comments »
अभी अभी मोहल्ला पर मदन कश्यप का आलेख पढा, जिस पर उन्होने राहुल गांधी द्वारा बाबरी मस्जिद पर दिये गये बयान के बारे में अपने विचार प्रकट किये हैं। संयोग से आज ही मैने क्रिस्टोफर क्रेमर (Christopher Kremer) की पुस्तक ‘इनहेलिंग द महात्मा’ (Inhaling the Mahatma) खत्म की है, जो कि लेखक के भारत में [...]
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