कुछ लोग दूसरों को गलतियों से सबक लेकर सीख लेते हैं, और खुद गलतियां नही करते, कुछ लोग खुद ठोकर खाते हैं और संभल जाते हैं अपनी गलतियां नही दुहराते, पर कुछ गलती पर गलती किये जाते हैं, सीखने की कोशिश भी नही करना चाहते।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद अडे हुए हैं, कश्मीर से सेना हटाने के लिये। कोई बताये, कि कश्मीर के हालात में अचानक ऐसे क्या क्रांतिकारी बदलाव आ गये हैं, कि अब वहाँ सेना की जरूरत महसूस नही होती? क्या आतंकवादी गतिविधियों पर काबू पा लिया गया है? कुछ तो पुराने अनुभवों से सबक लीजिये, असम में थोडे समय के लिये आतंकियों को बातचीत के लिये बुलाया जाता है, उनके खिलाफ कार्यवाही रोकी जाती है, और वो इस समय का पूरा उपयोग अपनी ताकत बढाने में करते हैं। पहले कश्मीर में सन २००० में भी “सीज फायर” किया गया था, लेकिन क्या कोई नतीजा निकला? और ये वही मुफ्ती मोहम्मद सईद हैं, जिनके गृहमंत्री पद पर रहते हुए सरकार ने आतंकवादियों के सामने घुटने टेके थे और इनकी बेटी के बदले आतंकवादियों को रिहा कर दिया गया था (औए उसके बाद से कश्मीर में हालात बिगडते चले गये)।
तो सईद जी, माना कि आपकी कुछ राजनीतिक मजबूरियां होंगी, पर देश का कुछ तो खयाल कीजिये। हमारे पूर्वजों ने कुछ गलतियाँ की, जिनके परिणाम हम भुगत रहे हैं, हम और गलतियां करेंगे तो आने वाली पीढियां हमे गरियायेंगी। या फिर किसी बडे नरसंहार या आतंकवादी हमले के बाद ही आप चेतेंगे?
पुनश्चः (३१ मार्च, २२:५५) – मनमोहन सिंह सरकार ने इस संकट का समाधान निकालने के लिये घाटी से सेना वापसी पर एक विशेषज्ञ और एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाई है (हर मर्ज की एक दवा – ‘कमेटी‘) । उधर आतंकवादियों ने राजौरी में पाँच लोगों की हत्या कर दी और डोडा जिले में एक बम हमले में १५ लोग घायल हो गये । कोई देख/सुन रहा है?
इन नेताओ को देश की नही वोटो की चिन्ता होती है। देश की चिन्ता होती तो ये हाल नही होते !
सारा खेल कुर्सी व वोटो का है. साथ ही कई अन्य मामले है जैसे ठेके वगेरे, इन पर अपना पना वर्चस्व जमाने की कोशिश है.
अब ऐसे नेताओ को गालियाँ देना भी गालियो की गरिमा का अपमान लगता है.
आशीष भाई ने ठीक कहा है। ये तो स्रासर बहुत बडी गलती होगी अगर वहां से सेना हटाओ तो – और ये बहुत बडी भयानक गलती है।
नितिन जी आप की बात ठीक है लेकिन मेरी समझ में यह नही आता की मुफ़्ती जी की क्या राजनैतिक मजबूरी हो सकती है।
आशीष जी, सागर जी, शुऐब जी आपसे सहमत हूँ ।
इदनम्म जी, एक कारण तो चरमपंथियों की सहानुभूति बटोरना हो सकता है, अन्य ढंकी-छुपी वजहें और भी हों तो मालूम नही ।
आपसे पहले भी पूंछा था, इदनम्म का मतलब तो बता दीजिये….
इन लोगों का बस चले तो देश को बेच खाएं। वोटों के लिए ये कितना गिर सकते हैं अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसे लोगों को पकड़कर देश से बाहर निकाल देना चाहिए।