वर्ल्ड कप में भारत की हार से थोडा-बहुत (ज्यादा नही) दुखी मैं भी हूँ, कल नाई की दुकान पर बैठा था तो एक गहन गंभीर चर्चा का मूक दर्शक भी बना, जो खिलाडियों, कोच और चयनकर्ताओं को तरह तरह के विशेषणों से नवाजते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर चूक हुई कहाँ, और कुछ भाई लोग अगले विश्व कप(जो कि भारत में ही होना है) की संभावित रणनीति पर भी चर्चा कर रहे थे। वैसे भारत में २०१० के कामनवेल्थ खेल भी होने हैं, पर उससे किसी को क्या सरोकार है| खेल तो बस क्रिकेट है।
तो इस विश्व कप की हार का गम गलत करने के लिये सेट मेक्स और तमाम न्यूज चैनल छोड कर सोंचा कि फिल्म ही देखी जाये। अब जले पे नमक यह, कि बीच में आने वाले विज्ञापनों में दिखाई दिये इरफान पठान, जिलेट को अपनी सफलता का राज बताते हुए। पठान और सफल, ये तो २ साल पहले हुआ था जी, कहाँ हो आप? ऐसा मैं आजकल तमाम चैनल्स पर देख रहा हूँ । भाई , माना कि तुमने विज्ञापन बना दिये हैं पहले ही, और दिखाना भी तुम्हारी मजबूरी है, लेकिन कुछ दिन तो रुक जाओ। होता ये है, कि उधर धोनी का विकेट गिरा, और उधर धोनी सेवन अप के विज्ञापन में दिखाई दे गये। ऐसा लगता है, नई नई विधवा को बन-ठन कर निकलते हुए देख लिया। यार, टाइमिंग का कुछ तो खयाल करो, ऐसे तो जो खरीदने वाला होगा, मारे गुस्से और चिढ के नही ही खरीदेगा।
चलते चलते: ये धोनी के सेवन-अप वाले विज्ञापन पर गौर करें। सेवन-अप पी कर धोनी लहराती जुल्फों में कहते हैं “…और मैं बन गया धोनी !!!” क्यों बेटा, इसे पीने के पहले धोनी नही थे क्या, कुछ और थे? तुम्हारे पापा सुनेंगे तो बहुत मारेंगे
एक दूसरे विज्ञापन में धोनी कहते हैं मेरी सफलता का राज…..का पंखा। और आश्चर्य की बात यह है कि विज्ञापन जब आया तब धोनी शुन्य पर आऊट हो कर पवेलियन लौट रहे थे।
धोनी का विकेट गिरा, और उधर धोनी सेवन अप के विज्ञापन में दिखाई दे गये। ऐसा लगता है, नई नई विधवा को बन-ठन कर निकलते हुए देख लिया। यार, टाइमिंग का कुछ तो खयाल करो,
ये पंक्तियाँ अच्छी लगी। मजेदार लेख…. अच्छा लपॆटा आपने।
बिलकुल ठीक कहा आपने। अच्छा लिखा है, हम भारतीयों के क्रिकेट प्रेम का नमूना आप यहाँ पर भी देख सकते हैं।
Yaar inki baate na karo. Wo kahte hain na ki dusprachar se bhi prachar hota hai to ye yahi hai. Hum D**** ka prachar hi kar rahe hain.
सही कह रहे हैं, टाईमिंग का कुछ तो ख्याल रखना ही चाहिये..
सागर जी, अतुल जी, समीर जी धन्यवाद ।
राजेश, सही का रहे हैं, बदनामी में भी नाम तो है ही…