मंजूनाथ के हत्यारों को सजा
March 26, 2007 by Nitin Bagla
उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने आज मंजूनाथ हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त को फाँसी की सजा सुनाई है, अन्य साथ अभियुक्तों को अजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पिछले शुक्रवार को ही अदालत ने आठों अभियुक्तों को दोषी करार दिया था ।
आइ. आइ. एम. लखनऊ के भूतपूर्व छात्र, मंजूनाथ षन्मुगम की हत्या, उत्तरप्रदेश के पेट्रोल माफिया ने नवम्बर २००५ में इसलिये कर दी थी क्योंकि इन्डियन आयल में सेल्स मेनेजर के पद पर कार्यरत मंजू, पेट्रोल में मिलावट करने वालों की मनमानी नही चलने दे रहे थे ।
मात्र(?) १७ माह की सुनवाई में आया यह फैसला स्वागत योग्य है, उस देश में जहाँ मुकदमें सालों तक घिसटते रहते हैं गवाह अपने बयानों से मुकर जाते हैं या गवाह मिलते ही नही। वो भी उस उत्तरप्रदेश में जहाँ शायद ‘जुर्म बहुत कम है’, लेकिन यह कहा जा सकता है कि न्यायपालिका में अभी भी बहुत दम है।
मंजूनाथ के परिवारजनों को अवश्य ही इस फैसले से कुछ सुकुन मिलेगा और स्वर्ग में बैठे मंजूनाथ आज जरूर मुस्कराए होंगे ।
मंजूनाथ ट्रस्ट की साइट यहाँ देखें ।

भारतिय न्याय व्यवस्था पर अब विश्वास मजबूत होते जा रहा है। देर है पर अंधेर नही !
अभी से कुछ कह नहीं सकते, जिस दिन संतोष , अफज़ल गुरु आदि को फँसी मिल जायेगी उस दिन इस लगेगा कि इनका भी नंबर आ सकता है। बाकि तो धन्य है हमारी न्याय व्यवस्था और हमारी सरकारें।
खाली सजा फरमाने से क्या होता है? उन पर अमल भी तो होना चाहिये।
bhai nyayapalika ke bharose hi chal raha hai ye desh,hum jaise logon ke liye antim sahara hain nyayapalika.
आशीष जी, वाकई पिछले कुछ समय में ऐसे फैसले आये हैं जिनसे न्यायपालिका पर विश्वास मजबूत होता है।
सागर जी, मुझे लगता है स्थिति इतनी निराशाजनक भी नही है। ये तो शायद आप भी मानें कि न्यायपालिका सजा ही सुना सकती है, गलत बातों पर अपनी तल्ख राय भी दे सकती है, लेकिन उसको अमल में लाना उसका कार्यक्षेत्र नही, अतः उसे दोष नही दे सकते। अतः सरकार को और न्याय व्यव्स्था को एक ही पंक्ति में रखना, एक ही तराजू में तौलना, शायद उचित नही ।
आलोक…”हम जैसे लोग”….कैसे लोग भाई? [:)] । वैसे तुम्हारी बात से सहमत हूँ।
Nitinjee, you have seen the high profile cases getting decided by the judiciary. Look at the lower judiciary - and the situation is not that rosy. I would also vote for Sagar Chand Naharjee’s comment.
ज्ञानदत्त जी, मंजूनाथ केस में फैसला एक जिला अदालत (lower judiciary) से ही आया है, फैसले पर अभी हाईकोर्ट की मुहर लगनी बाकी है।
’…situation is not that rosy..’ लेकिन जैसा कि मैने सागर जी को लिखा था, ‘…स्थिति इतनी निराशाजनक भी नही..’, शायद गिलास को आधा भरा/आधा खाली देखने का अन्तर है बस…