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Archive for February, 2007

लीजिये साहब, पंजाब में भाजपा-अकाली दल जीत गया, कांग्रेस को पटखनी दे दी और सरकार बना ली जायेगी|  भाजपा बहुत खुश है, नेता गण बयानबाजियां कर रहे हैं…जीत उत्तरांचल में भी हासिल हुई है ।
पर इसमें नया क्या है?
जनता बेचारी क्या करे, उसे तो नागनाथ और सांपनाथ में से एक को चुनना था, पिछली बार [...]

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पिछले काफी समय से मेरा हिन्दी पुस्तकें पढना काफी कम होता जा रहा है । जब तक कालेज में थे,  कालेज लाइब्रेरी में काफी साहित्य था हिन्दी में और कभी कभार पढते भी  थी..पर उस अनुपात में नही जिसमें अंग्रेजी की पुस्तकें ।और खरीदी तो बिल्कुल भी नही ।एक कारण अनुपलब्धता भी है..अधिकांश जगहों पर [...]

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प्रेमी प्रेमिका, प्यार तकरार, घरवालों/खलनायक से जंग, थोडी धां धूं और थोडी फ़ां फूं और अन्त में हीरो हिरोइनी का मिलन..और पिक्चर समाप्त। १०० में ८० बेईमान वाले देस की फ़िल्म इन्डस्ट्री की १०० में ८० फिल्में भी शादी पर आकर खत्म हो जाती है । लेकिन जिन्दगी…सही मायनों में वो तो शादी के [...]

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भुज के बाद अपना अगला पडाव था सूरत । याने गुजरात के पश्चिमी कोने से हमें दक्षिणी छोर की ओर जाना था । सूरत भारत का हीरा कटिंग और कपडा उद्योग का केन्द्र माना जाता है, पर सूरत शहर हमारी मंजिल नही थी । हमें जाना था सूरत के आदिवासी इलाके में । सूरत जिले [...]

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कच्छ, भारत का पश्चिमी कोना, हिन्दुस्तान का दूसरा सबसे बडा जिला । इसी कच्छ के जिला मुख्यालय भुज में अपने कदम पडे २६ जनवरी २००७ की शाम को, याने भूकम्पी गणतंत्र दिवस के ठीक छः साल बाद । गुजरात का यह मेरा पहला प्रवास था, २००५ में एकदिवसीय दाहोद यात्रा को छोड दूं तो, और [...]

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