“साहब..खडा हो सकता हूँ, या उसके लिये भी लाइसेन्स लेना होगा ?”
उस जमाने की फ़िल्म है गुरू, जब आपको हर काम, हर फ़ेक्ट्री, हर धन्धे के लिये लाइसेन्स चाहिये होता था । हमने वो जमाना से देखा नही, जब तक सोंचने समझने लायक हुए तब तक ९० का दशक आ चुका था । लेकिन वाकई [...]
Archive for January, 2007
मान गये ‘गुरू’ !
Posted in फ़िल्म, फ़िल्म समीक्षा on January 12, 2007 | 12 Comments »
अवलोकन २००६- याद रहेगा साल
Posted in बकर, मुद्दा, विचार on January 2, 2007 | 11 Comments »
हमेशा की तरह, इस पोस्ट को लिखने में भी थोडा विलंब हो गया, पर देर आये दुरुस्त आये….सब को नये साल की राम राम ।
उम्मीद करता हूं कि नया साल आप सबके लिये हर्षॊल्लास और खुशियों की सौगात लेकर आये ।
२००७ में आगे बढने से पहले एक नजर उन मुद्दों, घटनाओं और विषयों पर जिनके चलते २००६ याद किया जायेगा । तो [...]

