मीठा मीठा थू थू…!!!
November 15, 2006 by Nitin Bagla
कल बाल दिवस था, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म दिन ।सबको शुभकामनाएं(देर से ही सही) ।
पर कल एक और दिन भी था, वो था, विश्व मधुमेह दिवस, World Diabities Day. सुबह अखबार नही पढा था, सो शाम को टी.वीं पर देख कर पता चला, जहाँ कुछ ‘विशेषज्ञ’ इस पर ‘गहन चर्चा’ कर रहे थे ।मधुमेह के लिये भी कोई दिन रखा गया है, ये मुझे मालूम नही था, लेकिन अब मालूम चल गया(ठीक वैसे ही जैसे ग्रीटिंग कार्ड कम्पनियों की बदौलत फ़ादर्स, मदर्स, (गर्ल)फ़्रेंड्स और नाना प्रकार के दिन होने लगे हैं)। तो टी. वी. से ही पता चला की विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रपट के अनुसार सन २०२५ तक भारत में करीब ८ करोड मधुमेह रोगी होंगे ।
वर्तमान में कितने हैं ये तो मुझे पता नही, लेकिन अब तक मैने जितना भी पढा है, सब इस बात की और संकेत करते हैं कि आने वाले समय में मधुमेह भारत के लिये एक बडी चुनौती होगा । खानपान की आदतों में बदलाव और जीवन शैली में परिवर्तन इसका एक बडा कारण मान जा रहा है,एक ऐसा कारण जिसका निवारण, ‘डान’ की भाषा में कहें तो, मुश्किल ही नही नामुमकिन भी है । क्योंकि परिवर्तन तो होगा उसे रोकना असंभव है…हाँ प्रभावों को कम करने की कोशिश की जा सकती है। और सच कहें तो खानपान की समस्या के तो हम खुद भुक्तभोगी हैं ।
ज्यादा चिन्ता की बात ये है, कि शिकार होने वाला एक बडा हिस्सा बच्चों/किशोरों का है, वो तबका जो आज भारत की सबसे बडी पूंजी है, जिसके दम पर हम महाशक्ति बनने का सपना देख रहे हैं, क्योंकि २०२५ तक हमारे पास दुनिया के सबसे ज्यादा जवान लोग होंगे, पर अगर ये जवान मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों के शिकार हुए तो ?
२-३ साल पहले , कोचिंग इंस्टिट्यूट में हमारे गुरूजी ने एक बात कही थी, सार कुछ इस तरह से था…आने वाले १० साल में भारत की युवा पीढी के लिये तीन चीजें सबसे बडा खतरा होंगी एड्स, मधुमेह और गुटखा/तम्बाकू । आप क्या सोंचते हैं इस बारे में?
चलते चलते ये भी सोंचियेगा कि ८-१० करोड लोगों का यह समूह, कितना बडा बाजार होगा । अगर १० रुपये रोज प्रति व्यक्ति भी खर्च हो, तो आज के हिसाब से ही करीब २५-३० हजार करोड का बाजार, २०२५ तक तो ये रकम कहाँ पहुंच जायेगी ।गौरतलब है कि एक निजी बीमा कंपनी ने हाल ही में डायबिटीज के रोगियों के लिये विशेष बीमा योजना निकाली है ।याने नजर तो पड ही चुकी है भाई लोगों की यहाँ….आगे आगे देखिये होता है क्या?

आपने एक अच्छा विषय चुना है । वास्तव में ये चिंता की बात है कि विश्व में हर ५ मधुमेह के रोगियों में से १ भारत का है । बिना भोजन की प्रवृतियों को बदले और व्यायाम को दैनिक दिनचर्या में शामिल किये इस समस्या से निजात पाना संभव नहीं है ।
Bhrata shree,
aapka ye anuj hai na chintan ke liye, isliye hi to humne nadhumeh ke liye alag bima yojna nikala hai,aap kaho to aap tak apne vyapar pratinidhi ko bhijwaoon.
AApka
C/o Hum hain na bank
आपके गुरू जी ने खतरे का अंदाज़ा एकदम सही लगाया था . खतरा बढता ही जा रहा है. ‘आउटडोर ऐक्टिविटीज़’ एकदम कम होती जा रही हैं. इसमें एक योगदान कम्प्यूटर और उस पर खेले जाने वाले खेलों का भी है .