वंदे मातरम
September 7, 2006 by Nitin Bagla
वन्दे मातरम ।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम् ,
सस्य श्यामलाम् मातरम्।
वन्दे मातरम ॥
शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनिम् ,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनिम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम्,
वन्दे मातरम ॥
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‘वंदे मातरम’ से संबंधित कुछ तथ्य और तारीखें
७ नवम्वर १८७६ बंगाल के कांतल पाडा गांव में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने ‘वंदे मातरम’ की रचना की ।
१८८२ वंदे मातरम बंकिम चन्द्र चटर्जी के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में सम्मिलित ।
१८९६ रवीन्द्र नाथ टैगोर ने पहली बार ‘वंदे मातरम’ को बंगाली शैली में लय और संगीत के साथ कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में गाया ।
मूलरूप से ‘वंदे मातरम’ के प्रारंभिक दो पद संस्कृत में थे, जबकि शेष गीत बांग्ला भाषा में ।
अंग्रेजी में सबसे पहले अनुवाद अरविंद घोष ने किया ।
दिसम्बर १९०५ में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में गीत को राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया गया, बंग भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय नारा बना।
१९०६ में ‘वंदे मातरम’ देव नागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया, कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर ने इसका संशोधित रूप प्रस्तुत किया ।
१९२३ कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम के विरोध में स्वर उठे ।
पं. नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम अजाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेन्द्र देव की समिति ने २८ अक्तूबर १९३७ को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पेश अपनी रिपोर्ट में इस राष्ट्रगीत के गायन को अनिवार्य बाध्यता से मुक्त रखते हुए कहा था कि इस गीत के शुरुआती दो पैरे ही प्रासंगिक है, इस समिति का मार्गदर्शन रवीन्द्र नाथ टैगोर ने किया ।
१४ अगस्त १९४७ की रात्रि में संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ ‘वंदे मातरम’ के साथ और समापन ‘जन गण मन..’ के साथ..।
१९५० ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत और ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान बना ।
२००२ बी.बी.सी. के एक सर्वेक्षण के अनुसार ‘वंदे मातरम’ विश्व का दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय गीत ।
चित्र साभार जोगलिखी
विषय वस्तु राजस्थान पत्रिका से साभार
और हाँ, ‘वंदे मातरम’ से मेरी पहली याद दूरदर्शन से जुडी हुई है, जब दूरदर्शन की सुबह की सभा की शुरुआत इसी मधुर गान से हुआ करती थी…आज भी वंदे मातरम जुबां पर आते ही वही धुन मन में गूंज उठती है..
पुनश्चः सौम्यदीप ने अपने चिट्ठे पर वन्दे मातरम की २८ विभिन्न धुनों, रागों एवं शैलियों का संकलन किया है…अवश्य सुनें


sahi hai bhrata,tumne deshprem ki bhavna se mujhe aot prot kar diya.
Jai hind
“Bharat Mata Ki Jai”
वन्दे मातरम ॥
जानकारी अच्छी है और सौम्यदीप का लिंक भी.
वन्दे मातरम
दूरदर्शन की ये धुन किस किस को याद नहीं होगी,
मीडिया के बचपन के ही दिन कह लें तो भी चलेगा, और अन्जाने में ये धुन दिल में घर करती चली गई!
अब आज अचानक ये बवाल खड़ा हो गया….सिर्फ़ राजनीतिक सोच है!
बहरहाल, नितिन, आपकी लिखी जानकारी काफ़ी अच्छी है,और आपका ब्लाग भी रोचक है.
जब अपनी मिट्टी अपना वतन,
तराना कोई गाए चमन,
तो कैसा शिकवा , गिला ही कैसा,
झूम के क्यूं ना गाए मन
वन्दे मातरम.
-रेणू आहूजा.
वंदे मातरम
ye to bahut acchi baat hai ki aapne hame itni acchi jankari di