अपना देश वैसे भी चमत्कारों का देश है…बहुत साल पहले गणेश जी ने दूध पिया था, खबर ऐसी फ़ैली कि देखते देखते पूरे हिन्दुस्तान में गणेश जी उस दिन लाखों लीटर दूध पी गये..वो तो मोबाइल और न्यूज चैनलों का जमाना भी नही था हिन्दुस्तान में ऐसी खबरें फ़ैलने में वक्त थोडे ही लगता है…
अभी थोडे दिन पहले परिचर्चा पर गर्मागरम चर्चा हो गई, कि एक साधू महाराज ने पानी से घी बना दिया था… साथी लोगों ने कई धन्धे भी सुझा दिये इस बात पर…पर बात जोर नही पकड पाई..
अब ताजा किस्सा, मुम्बई के माहिम बीच पर समन्दर का पानी मीठा होने की खबर..लीजिये एक और चमत्कार…इस बार ये समुद्र के पास स्थित किसी दरगाह का प्रताप बताया जा रहा है…और फ़िर कल शाम तक गुजरात से भी खबर आई, कि वहां भी किसी बीच पर समुद्र का पानी मीठा हो गया है…
सरकारी विभाग समझा समझा कर परेशान है कि ये अत्यधिक बारिश, या भूमिगत जल रिसाव, या उतरते ज्वार के समय नदी से मीठे पानी की आवक की वजह से हो सकता है..पर ये सब सुनने समझने की फ़ुरसत किसे है..एक बार जब भावनाएं हावी हो जाती हैं तो फ़िर तर्क धरे के धरे रह जाते हैं…
और मुझे समझ में ये नही आ रहा है कि पब्लिक उस पानी को पी ही क्यों रही है…यार उससे कपडे धो लो..नहा लो…मंजन कर को…और कोई काम कर लो..
और हां धन्धे बाज भाई लोग यहां भी पीछे नही थी..बीच पर बोतल बेचने वालों ने अपनी दुकानें खोल ली और उनकी पौबारह हो गई…:) मान गये भई मुम्बई की स्पीरिट को….


भई, हमारे देश में अंधविश्वासों का ही बोल बाला है। हम लोग कुछ न कुछ इस प्रकार का खोजते रहते हैं।
उम्मीद है कि सभी धर्म ऐसे ही वजूद मे आए होंगे ? आपका क्या खयाल है
और जब बीमारीयाँ फ़लेंगी तो यही लोग सरकार को कोसेंगे की अंधविश्वास रोकने के लिये पूरे इन्तजाम क्यों नहीं किये? या
जब तक अंधविश्वास जिंदा है, यह सब अनवर फलता फूलता रहेगा, कभी किसी तरह, कभी किसी तरह.
पिछले हफ्ते अखबार में पढा , शायद अमेरिका में , चॉकलेट बनाने वाली फैक्टरी में , चॉकलेट जो बडे बर्तनों से नीचे चू जाता है उसमें से एक मरियम की मूर्ति की शक्ल में गिरा । भीड वहाँ भी उमड पडी देखने के लिये । लोगों ने अलौकिक अनुभव होने की बात भी कही ।
शायद मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा है जो चमत्कार की तलाश में रहता है ।
बहुत खूब लिखा है आपने..
वैसे मैने देखा है कि अन्धविष्वास पे लोग कमाने का कोई मौका नहीं छोडते हैं..
धन्यवाद आप सबका टिप्पणी के लिये…
शोएब जी, मेरा मानना है कि धर्म इस तरह वजूद में नही आये होंगे…ये जो हो रहा है वो अंधविश्वास, अंधभक्ति है, और मैं मानता हूं कि दोनो के बीच बहुत फ़र्क है…
प्रत्यक्षा जी, इसी तरह सिकी हुई डबलरोटी पर भी इसामसीह का चित्र उभरने की बात पढी/सुनी थी काफ़ी दिनों पहले..
और हाँ..इस पोस्ट को लिखने के बाद ये खबर भी पढी कि एक बार फ़िर देश में कई जगह ‘भगवान दूध पी गये’..
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Bhai,
u r right this is the spirit of mumbai, people here are so hard pressed ,com pletely drained out with their daily routine so any deviation(miracle)is more than welcome.