वामदलों का दोगलापन !!!
August 18, 2006 by Nitin Bagla
जहाँ एक ओर केरल में वाल सरकार ने कोला कंपनियों को लाल झंडा दिखाया है वहीं पश्चिम बंगाल में कामरेड बुद्धदेब ने कोला कंपनियों को अपने यहां हरी झंडी दे दी है…
ये वही कामरेड हैं जिनकी सेना ने बाबा रामदेव की दवा कंपनी के खिलाफ़ मोर्चा खोला था. तब पता नही कौन सा लेब परीक्षण उनके विरोध का आधार था, लेकिन अभी बुद्धदेब की सरकार ये कह रही है कि हम CSE की रपट को आंतिम सत्य नही मानते…हम और जाँच करवायेंगे..और तब तक तो कोला हमारे यहां चलता ही रहेगा…..याने जीवन रक्षक दवाइयों पर तो आप तुरंत प्रतिबंध लगा दो(या लगाने की मांग कर दो)…लेकिन कोला को चलता रहने दो…
वाह रे दोगलापन…धन्य हैं ये वामपंथी…ये वही वामपंथी हैं जो अमरीका और अमरीकन कंपनियों की बुराई करते नही थकते…अमरीकी पूंजीवाद की बुराई करते हैं और इसे लेकर केंद्र में हल्ला मचाते हैं..लेकिन अपने घर में ये वही सब करते हैं जिसे करने के लिये सारी दुनिया से मना करें
वाम मोर्चा के चेयरमेन बिमन बोस के इस बयान पर भी गौर फ़रमाइये “..findings show nothing abnormal. Whatever little has been found is there in packaged water bottles as well….“जब पानी में स्वीकार्य है तो कोला में क्यों नही? ठीक कहते हो भैय्ये…लाख टके की बात कही है…अच्छा हुआ ये नही कहा कि कर्पोरेशन से मिलने वाले पानी में क्या क्या होता है..जब उसे पी जाते हैं तो कोला क्यों नही???

वो कहते हैं न कि नया मुल्ला ज्यादा जोर से बाक (या बाग?) देता है। भारतीय कम्यूनिस्ट भी चोरी-चोरी अमेरिकापरस्त होने में लग गये हैं। अभी नया-नया जोश है। कोला की इतनी जोरदार वकालत इसी लिये हो रही है।
जय हो दोगलापन की !!
“दोगलापन”!!!
न जाने कितना गलापन हैं इन वामपंथीयों में.
दुर्भाग्य है कि एसे लोगों के हाथ में सत्ता की डोर है, प्रत्यक्ष ना सही! अप्रत्यक्ष ही सही
सब राजनीति और पूंजी का घालमेल है. तथ्य यह है कि ना तो बीआईएस के पास नार्म्स हैं और ना ही राजनीतिक दलों में इसे बनाने में कोई प्रतिबद्धता. इसलिए ये दोगलेपन पर उतारू हैं. पेप्सीको ने केरल में न्यायालय का सहारा लिया है. देखते हैं इससे कैसे निपटते हैं. अपना कहना यह है कि पहले सरकार मापदंड तय करे और फिर शीतल पेय वाले खरा नहीं उतरते तो चेतावनी लिखें. जिसे पीना हो पीये वरना गालियां दें. लंबा खेल हैं, अभी चल रहा है. क्लाइमैक्स बाक़ी है.