हैदराबादी बारिश…
July 27, 2006 by Nitin Bagla
यों तो छिट्पुट बारिश हैदराबाद में मई के महीने से हो रही है…पर परसों रात को मौसम की पहली तेज बारिश देखी और कल रात से तो लगातार हो रही है. कल ओफ़िस से वापस घर पहुंचने में काफ़ी परेशानी हुई, भीगने का मन भी था, पर हाथ में लेपटोप था…उसे बचाने के चक्कर में दुबके रहे.
बारिश मेरे पीहर (बोले तो घर) के आसपास भी काफ़ी अच्छी हुई है पिछले एक सप्ताह में…… घर की बारिश में और यहां हैदराबाद की बारिश में भी बहुत फ़र्क है…वो इसलिये, कि यहां तो मई जून की गर्मी हमने महसूस ही नही की, मई में ही कई बार छींटे पड गये थे…
वैसे मेरा जिला, झालावाड, राजस्थान के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है…पर है तो राजस्थान ही…सो मई-जून में तापमान ४८ तक पहुंच जाता है…ऐसी गर्मी में जून अंत आते आते सबकी निगाहें बादलों की ओर होती हैं…बादल का कोई झुन्ड दिखा नही, कि लगा कि अब तो बरसेंगे….इसी इन्तजार के चलते बारिश का मजा भी अलग ही होता है…अब ये क्या तरीका हुआ कि आप जेठ के महीने मे ही बरस गये…फ़िर इन्तजार का मजा कहा हुआ…..और यही मजा हम हैदराबाद मे नही ले पाये…वो विसाल-ए-यार और इन्तजार वाला एक शेर याद आ रहा है…बस वही अपने साथ हुआ, और ना ही मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू यहां आती है, कंक्रीट के जंगल में कहीं मिट्टी होगी तो खुशबू आयेगी ना…
तो जेठ मे गर्मी, और आषाढ मे इन्तजार के बाद सावन आते आते तो बादल बरस ही जाते है…पहले हमारे यहां आठ-आठ दस-दस दिन तक झडी लगती थी, तीन और से नदियों से घिरा है हमारा गांव..सो बिल्कुल टापू बन कर रह जाता…पुलिया पर १५-२० फ़िट पानी…..हम बडे चाव से “नदी देखने” जाते…सडक, बिजली, टेलीफ़ोन, अखबार, डाक..सब बंद :)..अब पिछले ५-७ साल से वैसी बरसात हो नही रही…पता नही क्यों..
तो फ़िलहाल तो जो है उसका ही मजा लिया जाये….”नदी देखने ” ना सही, उफ़नती हुई नालिया ही देखी जाएं…पुआ-पकौडी ना सही, इडली-सांभर का भोग लगाया जाए…बरसात में बस स्टोप पे भीगती हुई “पब्लिक” को निहारा जाए..औअर ये पोस्ट समाप्त कर्के…फ़िर से काम पर लग जाया जाए ![]()
